रांची: बारिश शुरू होते ही झारखंड के जंगलों में एक खास खजाना उगता है, जिसका लोग सालभर इंतजार करते हैं। नाम है रुगड़ा, जिसे स्थानीय भाषा में पुटू भी कहते हैं।
ये कोई आम मशरूम नहीं है। खेत में नहीं उगता, बल्कि मानसून में साल के जंगल खुद-ब-खुद इसे उगल देते हैं। स्वाद में लाजवाब और पोषण से भरपूर, रुगड़ा आज भी झारखंड की पहचान है। अगर आपने अब तक ट्राई नहीं किया, तो ये आर्टिकल आपके लिए है।
रुगड़ा मशरूम क्या है?
रुगड़ा एक देसी जंगली मशरूम है। ये ज्यादातर झारखंड के साल वनों में सावन-भादो में मिलता है। ये जमीन के नीचे होता है और ऊपर से सफेद, गोल दिखता है। इसे मिट्टी खोदकर बहुत संभाल कर निकाला जाता है। यही वजह है कि ये मार्केट में कम आता है और इसकी डिमांड बहुत ज्यादा रहती है।
स्वाद में क्यों है बेमिसाल?
लोग इसे ‘जंगल का चिकन’ भी कहते हैं। पकने के बाद ऊपर से हल्का क्रिस्पी और अंदर से एकदम सॉफ्ट। टेस्ट इतना रिच है कि नॉन-वेज खाने वाले भी फैन हो जाते हैं। सावन में जब बहुत से लोग मांस-मछली नहीं खाते, तब रुगड़ा शाकाहारी लोगों के लिए परफेक्ट विकल्प बन जाता है।
खरीदने और साफ करने की टिप
रुगड़ा मिट्टी में होता है, इसलिए इसे अच्छे से साफ करना बहुत जरूरी है।
टिप: खरीदते समय दुकानदार से 1-2 पीस कटवाकर अंदर जरूर देखें। ताजा रुगड़ा अंदर से सफेद और कड़ा होता है। सड़ा या काला हो तो बिल्कुल न लें।
15 मिनट में बनाएं झारखंडी स्टाइल रुगड़ा करी
- साफ करें और भूनें: रुगड़ा को पानी में अच्छी तरह धोकर बीच से दो टुकड़े कर लें। कड़ाही में हल्का तेल डालकर 3-4 मिनट तक भून लें। अलग रख दें।
- मसाला तैयार करें: उसी कड़ाही में तेल गर्म करें। जीरा तड़काएं। फिर प्याज और टमाटर डालकर गोल्डन ब्राउन होने तक भूनें।
- मसाले मिलाएं: अब हल्दी, धनिया पाउडर, लाल मिर्च और नमक डालें। मसाला तेल छोड़ने तक भूनें। चाहें तो अदरक-लहसुन पेस्ट भी डाल सकते हैं।
- रुगड़ा डालें: भुना हुआ रुगड़ा मसाले में डालें। धीमी आंच पर 5-7 मिनट तक ढककर पकाएं ताकि सारे फ्लेवर अंदर चले जाएं।
- फिनिशिंग टच: ऊपर से गरम मसाला और कटा हरा धनिया डालें। गर्मागर्म रोटी, भात या लिट्टी के साथ सर्व करें।

टेकअवे: मानसून का ये लिमिटेड एडिशन मशरूम सिर्फ स्वाद ही नहीं, झारखंड की मिट्टी की खुशबू भी देता है।
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