Friday, June 12, 2026

नेहरू से मोदी तक भारत के प्रधानमंत्री की पूरी कहानी, किसने क्या दिया और क्या खाया?

न्यूज डेस्क: 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ और संसदीय लोकतंत्र की स्थापना हुई। देश के शासन की कमान प्रधानमंत्री के हाथों में सौंप गई। पिछले लगभग 79 वर्षों में भारत ने कई प्रधानमंत्री का नेतृत्व देखा है। किसी ने देश की औद्योगिक नींव रखी, किसी ने युद्ध में विजय दिलाई, किसी ने आर्थिक सुधार किया तो किसी ने भारत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई। आइए जानते हैं भारत के सभी प्रधानमंत्रियों की पूरी कहानी।

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जवाहरलाल नेहरू (1947-1964)

स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू बने। उन्होंने 15 अगस्त 1947 से 27 में 1964 तक देश का नेतृत्व किया। आजादी के समय भारत गरीबी, बेरोजगारी और शिक्षा जैसी समस्याओं से जूझ रहा था। नेहरू ने पंचवर्षीय योजनाओं की शुरुआत की, बड़े बांधों और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों को बढ़ावा दिया। आईआईटी, एम्स और वैज्ञानिक संस्थानों की स्थापना उनके कार्यकाल की बड़ी उपलब्धि रही। हालांकि 1962 के भारत चीन-युद्ध में मिली हार उनकी सरकार की सबसे बड़ी विफलताओं में गिनी जाती है।

लाल बहादुर शास्त्री (1964 – 1966)

नेहरू के निधन के बाद लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री बने। उन्होंने 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में देश का सफल नेतृत्व किया। उनका दिया नारा “जय जवान, जय किसान” आज भी याद किया जाता है। उन्होंने कृषि और सोना दोनों को मजबूत करने पर जोर दिया। लेकिन ताशकंद समझौते के बाद जनवरी 1966 में उनका निधन हो गया और उनका कार्यकाल अचानक समाप्त हो गया।

इंदिरा गांधी (1966 – 1977)

शास्त्री के निधन के बाद इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनीं। उनके नेतृत्व में 1971 के युद्ध में भारत ने पाकिस्तान को हराया और बांग्लादेश का निर्माण हुआ। बैंकों का राष्ट्रीयकरण और हरित क्रांति उनके बड़ी उपलब्धियां रहीं। इससे देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की और बड़ा। लेकिन 1975 में लगाया गया आपातकाल उनके राजनीतिक जीवन का सबसे विवादास्पद फैसला माना जाता है इस दौरान नागरिक स्वतंत्रताओं पर कई प्रबंध लगाए गए।

मोरारजी देसाई और चरण सिंह (1977 – 1980)

1977 में आपातकाल के खिलाफ जनता का गुस्सा चुनाव में दिखाई दिया और मोरारजी देसाई देश के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने का प्रयास किया, लेकिन जनता पार्टी के अंदरूनी विवादों के कारण सरकार गिर गई। उनके बाद चरण सिंह प्रधानमंत्री बने, लेकिन वे संसद में बहुमत साबित नहीं कर पा सके और उनका कार्यकाल कुछ महीने में ही समाप्त हो गया।

इंदिरा गांधी की वापसी और दुखद अंत (1980 – 1984)

1980 में इंदिरा गांधी एक बार फिर सत्ता में लौटीं। इस दौरान पंजाब में उग्रवाद देश की बड़ी चुनौती बना। 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाया गया, जिसका उद्देश्य आतंकवादियों को स्वर्ण मंदिर परिसर में बाहर निकलना था। इसी वर्ष 31 अक्टूबर को उनकी हत्या कर दी गई, जिससे देश स्तब्ध रह गया।

राजीव गांधी (1984 – 1989)

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने। उन्होंने कंप्यूटर, सूचना तकनीक और दूरसंचार क्षेत्र को बढ़ावा दिया। उनके कार्यकाल में आधुनिक भारत की तकनीकी क्रांति की शुरुआत हुई। युवाओं को राजनीति में अवसर देने की भी कोशिश की गई। हालांकि बोफोर्स घोटाले के आरोपी ने उनकी सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा।

वी.पी. सिंह और चंद्रशेखर (1989 – 1991)

1989 में विश्वनाथ प्रताप सिंह प्रधानमंत्री बने। उन्होंने मंडल आयोग के सिफारिशों को लागू करते हुए पिछड़े वर्गों को आरक्षण दिया। यह सामाजिक के न्याय की दिशा में बड़ा कदम था, लेकिन देशभर में इसके विरोध में आंदोलन भी हुए उनके बाद चंद्रशेखर प्रधानमंत्री बने, लेकिन राजनीतिक समर्थन की कमी के कारण उनका कार्यकाल बहुत छोटा रहा।

पी.वी. नरसिम्हा राव (1991 – 1996)

1991 में भारत गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा था। ऐसे समय में पी.वी. नरसिम्हा राव ने देश की कमान संभाली। उनके नेतृत्व में वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत की। विदेश निवेश के दरवाजे खुले ,लाइसेंस राज खत्म होने लगा और भारतीय अर्थव्यवस्था नई दिशा में आगे बढ़ी। हालांकि 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस की घटना उनके कार्यकाल पर सवाल खड़े करती है।

देवेगौड़ा और गुजराल (1996 1998)

1996 में एच. डी. देवेगौड़ा प्रधानमंत्री बने। उनके बाद इंद्र कुमार गुजराल ने पद संभाला। दोनों नेताओं ने गठबंधन सरकार का नेतृत्व किया। गुजराल ने पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंध बनाने के लिए ‘गुजरात सिद्धांत’ को बढ़ावा दिया, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता के कारण दोनों सरकारें लंबा कार्यकाल नहीं पूरा कर सकीं।

अटल बिहारी वाजपेई (1998 – 2004)

अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के सबसे लोकप्रिय नेताओं में गिने जाते हैं। उनके कार्यकाल में 1998 में पोखरण परमाणु परीक्षण किया गया, जिससे भारत ने खुद को परमाणु शक्ति के रूप में स्थापित किया। 1999 में कारगिल युद्ध में भारत ने जीत हासिल की स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना के जरिए सड़क नेटवर्क को मजबूत किया गया। हालांकि गठबंधन राजनीति की चुनौतियां लगातार बनी रहीं।

मनमोहन सिंह (2004 – 2014)

2004 में मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने। उनके नेतृत्व में भारत ने तेज आर्थिक विकास देखा। सूचना का अधिकार कानून, मनरेगा और भारत-अमेरिका परमाणु समझौता उनकी सरकार की बड़ी उपलब्धियां रहीं। लेकिन 2जी स्पेक्ट्रम, कॉमनवेल्थ गेम्स और कोयला आवंटन जैसी विवादों में सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया।

नरेंद्र मोदी (2014 – वर्तमान)

2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने और 2019 व 2024 में लगातार दोबारा सत्ता में लौटे। उनके कार्यकाल में जीएसटी लागू हुआ, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और स्वच्छ भारत जैसे अभियान शुरू हुए। 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया। भारत ने जी-20 की सफल मेजबानी भी की। दूसरी ओर नोटबंदी, बेरोजगारी और कृषि कानून को लेकर सरकार को आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा।

भारत के प्रधानमंत्रियों का इतिहास केवल नेताओं की सूची नहीं, बल्कि देश के विकास की कहानी है। नेहरू ने आधुनिक भारत की नींव रखी शास्त्री ने आत्मनिर्भरता का मंत्र दिया, इंदिरा गांधी ने निर्णायक नेतृत्व दिखाया, नरसिम्हा राव ने अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी, वाजपेयी ने विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत किया, मनमोहन सिंह ने आर्थिक सुधारों की गति थी और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत वैश्विक मंच पर अपनी उपस्थिति को और मजबूत कर रहा है उपलब्धियों, चुनौतियों और विवादों के बावजूद भारत का लोकतंत्र लगातार आगे बढ़ता रहा है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।

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