झारखंड : झारखंड में कुड़मी समाज ने अपने अधिकारों और जनजातीय दर्जे की मांग को लेकर बड़े आंदोलन की घोषणा की है। आंदोलन की शुरुआत 2 नवंबर को हजारीबाग से होगी और इसका समापन 11 जनवरी 2026 को रांची में एक विशाल महारैली के रूप में किया जाएगा। आंदोलन में झारखंड के साथ-साथ बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से भी कुड़मी समाज के लोग शामिल होंगे।
आंदोलन का कार्यक्रम तय
कुड़मी समाज ने राज्यभर में चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तय की है।
- 2 नवंबर – हजारीबाग से आंदोलन की शुरुआत
- 16 नवंबर – चंदनकियारी (बोकारो) में रैली
- 23 नवंबर – जमशेदपुर में जनसभा
- 2 दिसंबर – धनबाद में कार्यक्रम
- 14 दिसंबर – नवाडीह में जनजागरण रैली
- 11 जनवरी 2026 – रांची के मोरहाबादी मैदान में महारैली
संगठन और नेतृत्व
इस आंदोलन के लिए वृहद झारखंड कुड़मी समन्वय समिति का गठन किया गया है। संयोजक हरमोहन महतो, शीतल ओहदार और कुड़मी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष शैलेंद्र महतो। महिला मोर्चा की जिम्मेदारी पिंकी महतो को दी गई है। प्रेम महतो को कोल्हान प्रमंडल अध्यक्ष बनाया गया है। नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन समाज की पहचान और सम्मान के लिए है, इसका किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं होगा।
मुख्य मांगें और चेतावनी
कुड़मी समाज की प्रमुख मांग है कि उन्हें अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिया जाए ताकि उन्हें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक अधिकार मिल सकें। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो वे आर्थिक नाकेबंदी जैसे कठोर कदम उठाने को मजबूर होंगे।
कुड़मी नेताओं का कहना है कि महारैली में लाखों की संख्या में लोग शामिल होंगे। रैली के जरिए सरकार पर दबाव बनाया जाएगा ताकि समाज की लंबे समय से चली आ रही मांगों को पूरा किया जा सके।


