पटना : पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर रही छात्रा की मौत को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद इस केस ने नया मोड़ ले लिया है और शुरुआती पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठने लगे हैं। पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहने वाली छात्रा की मौत के चार दिन बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि छात्रा के साथ यौन हिंसा की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इस खुलासे के बाद पुलिस की अब तक की जांच और शुरुआती दावों पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।
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एम्स पटना भेजी जाएगी रिपोर्ट

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार छात्रा के शरीर पर 10 से अधिक गंभीर चोट के निशान पाए गए हैं। गर्दन, कंधे और अन्य हिस्सों पर नाखून से खरोंच के निशान मिले हैं। साथ ही अंदरूनी हिस्सों में भी चोट की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट संकेत देती है कि छात्रा ने जबरन यौन हिंसा के दौरान खुद को बचाने की कोशिश की थी। मामले में किसी भी तरह की चूक से बचने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट को सेकेंड ओपिनियन के लिए AIIMS Patna भेजने का फैसला लिया गया है। पुलिस का कहना है कि जांच हर एंगल से की जा रही है और कोई भी पहलू छोड़ा नहीं जाएगा।
सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका
सबूतों से छेड़छाड़ न हो, इसके लिए शंभू गर्ल्स हॉस्टल के वार्डन मनीष रंजन को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस को आशंका थी कि हॉस्टल परिसर में साक्ष्य प्रभावित किए जा सकते हैं। इसके अलावा छात्रा का इलाज करने वाले सभी डॉक्टरों के बयान भी दर्ज कर लिए गए हैं। पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए पटना से लेकर जहानाबाद तक जांच शुरू कर दी है। अब तक 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा चुकी है। छात्रा जिस-जिस रास्ते से गुजरी थी, उन सभी स्थानों के फुटेज को सबूत के तौर पर इकट्ठा किया गया है।

पहले आत्महत्या का दावा
छात्रा की मौत के बाद 8 जनवरी को पुलिस ने दावा किया था कि यूरिन रिपोर्ट में नींद की दवा का ओवरडोज पाया गया है। साथ ही मोबाइल की सर्च हिस्ट्री में नींद की दवा और आत्महत्या से जुड़े सर्च मिलने की बात कही गई थी। इसी आधार पर पुलिस ने छात्रा के डिप्रेशन में होने की आशंका जताई थी और यौन हिंसा से इनकार किया था। छात्रा की मौत के बाद परिजनों ने शुरू से ही मारपीट और दुष्कर्म की आशंका जताई थी, लेकिन पुलिस ने शुरुआती जांच में इन आरोपों को खारिज कर दिया। परिजनों का आरोप है कि पुलिस और हॉस्टल प्रशासन ने मामले को दबाने की कोशिश की।

प्रशांत किशोर का ऐलान
मामले को लेकर राजनीति भी तेज हो गई है। जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर छात्रा के परिजनों से मिलने जहानाबाद पहुंचे। उन्होंने कहा कि पुलिस को अपनी शुरुआती गलतियों को सुधारना चाहिए और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाना चाहिए। प्रशांत किशोर ने कहा कि वह इस मामले को लेकर पटना में डीजीपी और एसएसपी स्तर के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। उन्होंने साफ कहा कि अगर छात्रा को न्याय नहीं मिला तो जन सुराज संविधान के दायरे में रहकर हर लोकतांत्रिक कदम उठाएगा। 5 जनवरी को छात्रा घर से हॉस्टल लौटी थी। 6 जनवरी की रात उसने अन्य छात्राओं के साथ खाना खाया और फिर अपने कमरे में चली गई। काफी देर तक बाहर न आने पर हॉस्टल कर्मियों ने दरवाजा तोड़ा और उसे बेहोशी की हालत में अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
अब भी कई सवाल बाकी
पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। क्यों पुलिस ने बिना ठोस सबूत के मामले को आत्महत्या बताया? क्यों छात्रा के शरीर पर मौजूद चोटों को शुरू में नजरअंदाज किया गया? और क्यों हॉस्टल संचालक ने बिना पुलिस को सूचना दिए दरवाजा तोड़ा? पीड़िता के परिजन अब पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सच्चाई सामने आए और दोषियों को सख्त सजा मिले। पुलिस का दावा है कि अब सभी पहलुओं पर गंभीरता से जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद यह मामला अब पूरी तरह बदल चुका है। आने वाले दिनों में जांच में और क्या खुलासे होते हैं और दोषियों पर कब कार्रवाई होती है, इस पर सबकी नजर बनी हुई


