Monday, June 29, 2026

AIR NOW Exclusive: झारखंड शिक्षक भर्ती में किसी को 60 साल 1 महीने की उम्र में मिली नियुक्ति, तो कोई 24 घंटे बाद हो जाएगा सेवानिवृत्ति

ग्राउन्ड रिपोर्ट: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राजधानी रांची के खेलगांव में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में 1,042 नव नियुक्त सहायक आचार्यों को नियुक्ति पत्र सौंपे। इस पूरे समारोह में जहाँ हर तरफ जश्न का माहौल था, वहीं पलामू के मोहम्मद नईम अंसारी सबसे बड़े चर्चा का केंद्र बन गए। वजह ऐसी थी जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह गया- नईम अंसारी को सरकारी शिक्षक बनने का जॉइनिंग लेटर तब मिला, जब वे रिटायरमेंट की उम्र सीमा पार कर चुके हैं।

यह दर्द सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं है बल्कि कई ऐसे अभियार्थी हैं जो इस हालात से गुजर रहे हैं। चतरा के नंदलाल को रिटायरमेंट के उम्र सीमा खत्म होने के एक दिन पहले नियुक्ति पत्र। वहीं खूँटी की भारती धान को ऐसे उम्र में नौकरी मिली है जब वो शारीरिक तौर वृद्ध हो चुकी हैं, उनकी कमर झुक गई है और वो चलने में भी असहज हैं। कई ऐसे भी सहायक आचार्य हैं जो मात्र 1 या 2 साल नौकरी कर पाएंगे।

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सपना पूरा हुआ, पर नौकरी करने की उम्र निकल गई

मोहम्मद नईम अंसारी 31 मई 2026 को ही अपनी उम्र सीमा के अनुसार सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उन्होंने समय रहते सहायक आचार्य भर्ती परीक्षा के लिए पूरी ईमानदारी से आवेदन किया था, परीक्षा पास की और उनका चयन भी हो गया। लेकिन विडंबना देखिए कि सरकारी सिस्टम और नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने में इतनी देरी हुई कि जब तक नियुक्ति पत्र हाथ में आया, तब तक वे तकनीकी रूप से रिटायर हो चुके थे।

WhatsApp Image 2026 06 29 at 8.16.27 PMनियुक्ति पत्र हाथ में लेकर भावुक हुए नईम अंसारी ने अपनी खुशी और दर्द दोनों बयां करते हुए कहा: “सरकारी शिक्षक बनने का मेरा बरसों पुराना सपना तो आज पूरा हो गया, लेकिन अफसोस इस बात का है कि अब मुझे बच्चों को पढ़ाने और नौकरी करने का मौका नहीं मिल पाएगा, क्योंकि मैं एक महीने पहले ही सेवानिवृत्त हो चुका हूँ।”

“मुझे सेवा विस्तार दें या बुढ़ापे का सहारा” – नईम की CM से गुहार

इस अनोखे मामले ने अब सरकार के सामने भी एक अजीब स्थिति पैदा कर दी है। मोहम्मद नईम अंसारी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य सरकार के सामने मानवीय आधार पर फैसला लेने की मांग रखी है। उन्होंने सरकार के सामने दो मुख्य मांगे रखे हैं। पहला ये कि भर्ती प्रक्रिया में देरी उनकी किसी गलती की वजह से नहीं बल्कि सिस्टम की वजह से हुई है, इसलिए उन्हें दो साल का सेवा विस्तार दिया जाए ताकि वे स्कूलों में बच्चों को अपनी सेवाएं दे सकें। वहीं दूसरा ये कि अगर तकनीकी कारणों से सेवा विस्तार संभव नहीं है, तो सरकार उनके चयन को मान्यता देते हुए उन्हें वृद्धावस्था पेंशन का लाभ देने पर विचार करे।

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चतरा से नवनियुक्त आचार्य नंदलाल नियुक्ति मिलने के 24 घंटे के बाद ही सेवानिवृत्ति हो जाएंगे। एयर नाउ से बातचीत में उन्होंने बताया कि उनका जन्म जून 1968 में हुआ था और कल यानि 30 जून, 2026 को वो 60 वर्ष के हो जाएंगे। यानि नियुक्ति के नियमों के अनुसार वो कल ही रिटायर हो जाएंगे। क्यूंकि 30 जून को राज्य में हूल दिवस की छुट्टी है, ऐसे में वो एक दिन भी आपनि सेवा नहीं दे पाएंगे। दरअसल नंदलाल की इक्षा थी कि वो एक दिन के लिए ही सही, एक सरकारी शिक्षक के तौर पर सेवा दें। लेकिन हालात ऐसे हैं कि उनका ये सपना भी अधूरा रह जाएगा।

उन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए आगे बताया कि “मेरी मां की इक्षा थी की मैं सरकारी नौकरी करूं, उनके जीते जी तो ये सपना नहीं पूरा हो सका। जबकि मैंने 2013 और 2016 की टेट (TET) परीक्षा पास कर रखी थी और पिछले 20 वर्षों से पारा-शिक्षक के तौर पर कार्यरत था, अब जाकर सरकारी शिक्षक नियुक्त हुआ हूँ। लेकिन सरकारी नौकरी का इस उम्र में मिलना मेरे लिए किसी काम का नहीं।”

झुकी पीठ, लड़खड़ाते कदमों के साथ नियुक्ति पत्र लेने पहुंची भारती

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खूँटी जिला से नियुक्त हुई 56 वर्षीय शिक्षिका भारती धान पिछले 26 वर्षों से पारा शिक्षक के तौर पर योगदान दे रही थी। साथ ही उन्होंने साल 2016 में टेट की परीक्षा भी पास किया था, लेकिन उस वक्त भी उन्हें नौकरी नहीं मिली। उनको दुख है कि उनको नौकरी तब मिल रही है जब वो शरीरिक रूप से वृद्ध हो चुकी हैं। हालात ऐसे हैं कि भारती की पीठ झुक चुकी है, जोड़ों में हमेशा दर्द रहता है जिस कारण वो ठीक से चल भी नहीं पाती। परेशानी ये है कि ऐसे हाल में वो कैसे लंबी दूरी तय कर बच्चों को पढ़ने जाएंगी।

सिस्टम की लेतीफी पर उठे सवाल

नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में सामने आए इन मामलों ने झारखंड में प्रतियोगिता परीक्षाओं और बहाली प्रक्रिया में होने वाली देरी पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। योग्य अभ्यर्थी जो मेरिट के आधार पर चुनकर आया, जिसने दो-दो बार टेट जैसी पात्रता परीक्षा उत्तरीन की वह सिर्फ प्रशासनिक लेतीफी के कारण नौकरी के हक से वंचित रह गया। जब नौकरी मिली तो उम्र की समय सीमा निकाल गई।

अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री हेमंत सोरेन इस पूरे मामले में क्या संज्ञान लेते हैं और क्या कार्यवाई करते हैं?

मामले को गहराई से समझने के लिए देखें AIR NOW कि ये ग्राउन्ड रिपोर्ट:

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