Tuesday, July 21, 2026

कौन है जनसुराज कि दावेदार प्रीति किन्नर?

बिहार विधानसभा चुनाव: बिहार विधानसभा चुनाव अपने चरम पर है, पार्टियों में सीट को लेकर अभी भी क्लैरिटी नहीं है, और वही प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर अपने प्रत्याशियों की पहली सूची 9 अक्टूबर को जारी कर दी है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह ने बताया कि दो तीन दिनों में दूसरी लिस्ट जारी की जाएगी।
फर्स्ट लिस्ट में 51 प्रत्याशियों को जगह मिली है।और जबसे नामों की घोषणा हुई है तबसे उनके 51 प्रत्याशियों में से एक प्रत्याशी की बहुत चर्चा हो रही है। उनके वाल्मीकिनगर सीट से थारू जनजाति के उम्मीदवार को उतारा गया है तो वहीं गोपालंज के भोरे सीट पर एक थर्ड जेंडर को मौका दिया गया है जिसके बाद भोरे विधानसभा की सीट चर्चे में आ गई है।
गोपालगंज की विधानसभा सीट एक एससी सुरक्षित सीट है और पार्टी ने यहां प्रीति किन्नर नामक थर्ड जेंडर को चुनाव लड़ने का मौका दिया है। फिलहाल भोरे विधानसभा का प्रतिनिधित्व सुनील कुमार करते हैं जो नीतीश कुमार की सरकार में शिक्षा मंत्री भी हैं। सुनील कुमार आईपीएस पदाधिकारी थे। नीतीश कुमार ने अवकाश प्राप्ति के बाद सुनील कुमार को जनता दल यूनाइटेड में शामिल कराया।
माना जा रहा है कि सुनील कुमार को फिर से जदयू टिकट देगी तो ऐसे में एक मंत्री के सामने एक किन्नर का होना एक दिलचस्प लड़ाई होगी जो इस क्षेत्र में देखने को मिलेगी।

इस मौके पर एक एक कविता याद आ रही है जिसकी दो लाइन्स बहुत कमाल की है और यहां बहुत फीट भी बैठती है, वो कविता किन्नर पर ही लिखी गई है, और वो क्या सोचते हैं उसपर है, तो वो लाइन्स यूं हैं कि , “जब हमको भी भगवान ने बनाया है तो क्यों हमपर हंसता ये जमाना है, जब सब भगवान का लिखा हुआ है तो भेद भाव ये क्यों, चलो हम तो मजबूरी में ताली पिटते हैं, मगर तुम हमपर हंसने के लिए पीटते हो। और ये लाइन्स इसलिए पढ़ी मैने क्योंकि आरसीपी ने जब उनके नाम की घोषणा की तो वही तालियां बजने लगीं पर इस बार तालियां हंसने के लिए नहिं बल्कि सम्मान में बजाई गई।
यह दर्शाता है कि पार्टी राजनीति में पारंपरिक चेहरों के बजाय आम लोगों और वंचित समुदायों के प्रतिनिधियों को अवसर देने के लिए भी प्रतिबद्ध है। और जन सुराज ने एक मौजूदा मंत्री के सामने किन्नर उम्मीदवार को उतारकर इस मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। भोरे एक अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है, और प्रीति किन्नर लंबे समय से जन सुराज से जुड़ी हुई हैं तो ऐसे में उनको मौका दिया गया, प्रशांत किशोर का ये कदम जितना बिहार राजनीति के लिए प्रगतिशील हैं उतना ही किन्नर समाज और उनसे जुड़े लोगों के लिए एक सम्मान और कुछ कर दिखाने का मौका भी है।

प्रीति किन्नर, तृतीय लिंग (ट्रांसजेंडर) समुदाय से आती हैं। प्रीति किन्नर की उम्र 41 साल है और उन्होंने 8वीं कक्षा तक पढ़ाई की है। प्रीति किन्नर मूल रूप से सीतामढ़ी जिले के सोनवर्षा प्रखंड के खाप गांव की रहने वाली हैं, लेकिन वर्ष 2003 से भोरे प्रखंड के कल्याणपुर में रह रही हैं. वह एक ट्रांसजेंडर होने के साथ-साथ एक एक्टिव सोशल वर्कर भी हैं जो गरीबों के सुख-दुख में हमेशा उनके साथ खड़ी रहती नज़र आई हैं।वे पिछले दो दशकों से गरीबों और वंचितों के बीच सामाजिक कार्यों के लिए जानी जाती हैं. 41 वर्षीय प्रीति किन्नर 2008 से समाजसेवा में सक्रिय हैं. कोरोना के दौरान वे तब चर्चा में आईं जब वे लोगों के घरों में खाना पहुंचा रही थीं. उन्होंने सैकड़ों लोगों को अपने रुपयों से राशन भी पहुंचाया.

प्रीति ने अब तक 27 गरीब लड़कियों की शादियां करवाई हैं और जरूरतमंदों की सहायता में हमेशा आगे रहती आई हैं. आठवीं तक शिक्षित प्रीति किन्नर की जीविका का मुख्य साधन बधाई गाना और पशुपालन है. तो ऐसे में वो जितना भी काम करती है गरीबों के लिए वो सब काम लोगों से बधाई के रूप में मिले पैसे और क्राउड फंडिंग के जरिए उन्होंने किए हैं.

हालांकि ये कोई पहली बार नहीं है जब ए किन्नर को उम्मीदवार के रूप में उतारा गया हो। पिछले विधानसभा चुनाव में इसी जिले की हथुआ सीट से लोक जनशक्ति पार्टी ने रामदर्शन प्रसाद उर्फ मुन्ना किन्नर को अपना उम्मीदवार बनाया था. उस वक्‍त मुन्ना किन्नर को 9894 वोट मिले थे. आपको बता दूं कि मुन्ना किन्नर जो है वो जिला परिषद सदस्य भी रहे हैं. मुन्ना किन्नर के राजनीति में आने के बाद स्थानीय स्तर पर ट्रांसजेंडर लोगों में राजनीति के प्रति रुचि बढ़ी है. और बिहार के अलावा बात करें तो 2015 में पहली बार था जब पंजाब में महिलाओं और पुरुषों के अलावा “तीसरे” लिंग का उम्मीदवार भी विधानसभा चुनाव में खड़ा हुआ था। पंजाब के 1145 उम्मीदवारों में मुमताज अकेली ट्रांसजेंडर उम्मीदवार थी । तब मुमताज को बहुजन समाज पार्टी ने बुचो मंडी विधानसभा क्षेत्र से टिकट दिया था।

कब मिला इस वर्ग को अधिकार चलित ये जान लेते है। हमेशा देश की राजनीति में हाशिए पर रखे किन्नर वर्ग को आजाद भारत में काफी सालों बाद मतदान का अधिकार दिया गया. जिसके बाद से चुनाव के जरिए लोकतंत्र में इस वर्ग के लोगों की वजूद की बात होने लगी. साल 1994 था, जब किन्नर वर्ग को लोकतंत्र का हिस्सेदार बनाया गया. इसके तहत इन्हें मतदान का अधिकार मिला. जिसके बाद से इस वर्ग की लोकतंत्र में हिस्सेदारी सुनिश्चित की गई.

सबसे पहले 1994 में किन्नर वर्ग को चुनावी अधिकार मिलने के बाद इस वर्ग के लोगों की हिस्सेदारी तो सुनिश्चित हुई, लेकिन उसके बाद इन्हें लोकतांत्रिक सदन में पहुंचने में लंबा वक्त लगा.पहली बार मध्यप्रदेश ऐसा राज्य बना था जिसने एक किन्नर को विधायक बनाया था.फिर 1998 में देश की पहली विधायक शबनम मौसी बनीं थी, तो इधर मध्यप्रदेश की ही कमला जान एमपी से देश की पहली महापौर बनीं. मध्य प्रदेश में इस वर्ग के एक ही परसेंट वोटर्स थे .एमपी में पहली बार था जब किन्नर विधायक चुना गया तो, इसकी चर्चा पूरे देश में हुई. लेकिन साल 2018 का चुनाव भी उस वक़्त एक चर्चा का विषय बना रहा था. करीबन 6 किन्नर उम्मीदवारों ने चुनावी मैदान में अपनी ताल ठोकी. इनमें कोतमा से पूर्व विधायक शबनम मौसी, मुरैना की अंबाह सीट से नेहा किन्नर, दमोह जिले से रिहाना सब्बो बुआ, शहडोल से सल्लू मौसी, होशंगाबाद से पांची देशमुख और इंदौर-2 से बाला वैश्वरा चुनावी मैदान में उतरीं थी. इनमें दो उम्मीदवार को छोड़ दें, तो सभी चार उम्मीदवार पहली बार चुनाव मैदान में उतरे थे.
और अब 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जनसुराज की ओर से प्रीति किन्नर उम्मीदवार बनी हैं । हाल के दिनों में उन पर जाति छिपाने का आरोप लगा था, लेकिन उन्होंने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वे समाज की सेवा और जनता की आवाज बनने के लिए राजनीति में आई हैं. गरीब और पिछड़े तबकों में उनकी गहरी पकड़ मानी जाती है, जो चुनावी समीकरणों में बड़ा असर डाल सकती है। उनके समर्थकों का मानना है कि प्रीति किन्नर उनके मुद्दों को मजबूती से सदन तक पहुंचाएंगी। और अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भोरे की जनता इस अनोखे राजनीतिक प्रयोग को किस रूप में स्वीकार करती है। उनके समर्थक इसे बदलाव की शुरुआत मान रहे हैं। समर्थकों का मानन है कि प्रीति युवाओं द्वारा आयोजित किए जाने वाले हर एक खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम, गरीबों की मदद करने में अपना अधिक समय व्यतीत करती है । स्थानीय लोग उन्हें अपनों में से एक मानते है। और इसी की बदौलत भोरे विधानसभा में एक अपना अमिट पहचान छोड़ चुकी है। इसी को देखते हुए जनसुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर ने प्रीति किन्नर पर अपना भरोसा जताया है।

बिहार पुलिस में भी किन्नर समाज को नौकरी में आरक्षण दिया गया है। कई किन्नर वर्तमान में दारोगा और सिपाही के पद्द पर नियुक्त भी और अपने कार्यभार को संभाल रहे है। समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए इन को यह प्रमोशन दिया गया है ताकि समाज में उनको भी बराबरी और हक मिल सके। राजनीति में स्थान देकर किन्नर समान को प्रशांत किशोर और जन सुराज ने सम्मान दिया है। भोर विधानसभा सीट को त्रिकोणीय टक्कर माना जा रहने, JDU, CPI(ml) और जनसुराज के बीच, तो देखना ये होगा कि इस बार बाजी कौन मारता है।

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एयर नाऊ स्पेशल

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