बोकारो: झारखंड के बोकारो जिला अंतर्गत पिंडराजोरा थाना क्षेत्र का बहुचर्चित पुष्पा महतो हत्याकांड एक नए और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। पुलिस कस्टडी में मुख्य आरोपी दिनेश कुमार महतो का वीडियोग्राफी के जरिए दर्ज किया गया इकबालिया बयान अब इस पूरे मामले का सबसे बड़ा और अचूक साक्ष्य बन चुका है। यह वीडियो बयान न सिर्फ हत्यारे दिनेश को उसके अंजाम तक पहुंचाएगा, बल्कि चंद रुपयों की खातिर मामले को दबाने वाले पिंड्राजोरा थाना के तत्कालीन प्रभारी अभिषेक रंजन और तत्कालीन मुंशी की संलिप्तता का सबसे बड़ा सबूत बनकर सामने आया है।
Highlights:
26 पुलिसकर्मी पाए गए निर्दोष, सस्पेंशन हुआ खत्म
इस पूरे मामले में एक और बड़ा अपडेट यह है कि पिंड्राजोरा थाने के जिन 28 पुलिसकर्मियों को एक साथ सस्पेंड किया गया था, उनमें से 26 पुलिसकर्मियों को बोकारो के पूर्व सिटी डीएसपी आलोक रंजन द्वारा की गई गहन जांच के बाद निर्दोष पाते हुए निलंबन मुक्त कर दिया गया है।
जांच में यह साफ हो गया है कि इस पूरे हत्याकांड और घूसकांड में बाकी पुलिसकर्मियों की कोई संलिप्तता नहीं थी, बल्कि मुख्य रूप से थाना प्रभारी अभिषेक रंजन और तत्कालीन मुंशी ही इस साजिश में शामिल थे। अब इन दोनों मुख्य दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच और बर्खास्तगी की कानूनी प्रक्रिया को बेहद तेज कर दिया गया है।
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घूस लेकर जिला कप्तान को किया गुमराह
इससे पहले सूबे की डीजीपी तदाशा मिश्रा के निर्देश पर बोकारो के तत्कालीन एसपी हरविंदर सिंह ने मामले के आरोपी दिनेश महतो से गहन पूछताछ की थी। इस पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि थाना प्रभारी अभिषेक रंजन मुख्य आरोपी दिनेश से कथित तौर पर नकद और शराब के रूप में मोटी घूस की रकम लेकर जांच को लगातार भटका रहा था और अपने ही जिला कप्तान को गुमराह कर रहा था।
इसी घोर संवेदनहीनता और लापरवाही को देखते हुए पूरी व्यवस्था को साफ करने के लिए तत्कालीन एसपी ने पूरे थाने को ही सस्पेंड कर दिया था, जबकि सस्पेंड सिर्फ थाना प्रभारी और मुंशी को करना था। इसमें से अब पाक-साफ निकले 26 कर्मियों को सिटी डीएसपी की रिपोर्ट पर राहत मिल गई है, जबकि दोषी थाना प्रभारी और मुंशी पर कानून का शिकंजा कस गया है।
जुलाई 2025 से शुरू हुआ था सिस्टम की संवेदनहीनता का खेल
सिस्टम की इसी संवेदनहीनता और रक्षक ही भक्षक बन जाने वाली इस खौफनाक वारदात की शुरुआत जुलाई 2025 में हुई थी। पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र के खुंटाडीह गांव निवासी पुष्पा महतो, 21 जुलाई 2025 को कॉलेज में फॉर्म जमा करने के लिए घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। बेटी के लापता होने पर उसकी बेबस मां रेखा देवी जब पिंड्राजोरा थाना पहुंचीं, तो थाना प्रभारी और मुंशी की मिलीभगत के कारण पुलिस का दिल नहीं पसीजा। शिकायत लेने से साफ मना कर दिया गया और परिजनों को दौड़ाया जाता रहा।
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पुलिस ने लाचार पिता को पुणे स्टेशन पर भीख मांगने को छोड़ा
तीन दिन बोकारो एसपी से मिलने और एसपी द्वारा निर्देश दिए जाने के बाद थाना प्रभारी ने महज एक सनहा दर्ज कर खानापूर्ति की। घटना के करीब 10 दिन बाद 4 अगस्त 2025 को एफआईआर दर्ज हुई। इसके बाद भी पुलिस महीनों तक जांच के नाम पर माता-पिता को प्रताड़ित करती रही। हद तो तब हो गई जब दिसंबर 2025 में पुष्पा के पुणे में होने की सूचना पर पुलिस की एक टीम मृतका के पिता को साथ लेकर पुणे तो गई, लेकिन वहां लाचार पिता को अकेले स्टेशन पर छोड़कर पुलिसकर्मी भाग निकले। इस दौरान पिता का फोन भी चोरी हो गया और वह भीख मांगकर किसी तरह वापस घर लौटे।
हाई कोर्ट की फटकार के बाद जागी पुलिस, SIT ने उगलवाया सच
स्थानीय पुलिस के इस अमानवीय रवैये से टूट चुके पीड़ित परिवार ने अंततः सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से झारखंड हाईकोर्ट में हेबियस कॉर्पस ( बंदी प्रत्यक्षीकरण ) याचिका दायर की। फरवरी 2026 में इस याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने पुलिस को कड़ी फटकार लगाई।
कोर्ट के तीखे तेवरों के बाद डीजीपी के निर्देश पर आनन-फानन में डीआईजी संध्या रानी मेहता के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया। एसआईटी ने जब पुष्पा के प्रेमी दिनेश कुमार महतो को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की, तो रोंगटे खड़े कर देने वाला सच सामने आया।
मुख्य आरोपी दिनेश ने कबूल किया कि वह और पुष्पा पिछले तीन साल से प्रेम संबंध में थे। पुष्पा लगातार उस पर शादी का दबाव बना रही थी, जिससे पीछा छुड़ाने के लिए उसने साजिश रची। 21 जुलाई 2025 को उसने पुष्पा को चास कॉलेज के पास बुलाया और फुसलाकर पास के एक सुनसान जंगल में ले गया, जहां चाकू से रेतकर पुष्पा की निर्मम हत्या कर दी और शव को झाड़ियों में छिपा दिया। इसके करीब 8-9 महीने बाद उसके बयान के आधार पर पुष्पा का क्षत-विक्षत कंकाल और हत्या में इस्तेमाल चाकू बरामद किया गया।
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