Friday, July 3, 2026

लोक अदालत के फैसले के अनुपालन नहीं होने पर झारखंड हाईकोर्ट नाराज, सचिव को लगाई कड़ी फटकार

रांची : झारखंड के जल संसाधन विभाग से जुड़े दैनिक वेतन भोगी कर्मियों से जुड़े पेंशन लाभ के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने लोक अदालत के अवॉर्ड को लागू नहीं करने पर कड़ी नाराजगी जताई है. शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने विभागीय सचिव प्रशांत कुमार को कड़ी फटकार लगाते हुए लोक अदालत के अवॉर्ड को लागू करने और याचिकाकर्ताओं को बकाया राशि 6 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करने का निर्देश दिया.

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि आखिर अब तक लोक अदालत के अवॉर्ड का पालन क्यों नहीं किया गया. इस मामले में विभाग ने कोर्ट के अवार्ड के अनुपालन के लिए लगभग 20 दिनों के समय की मांग की लेकिन हाईकोर्ट ने केवल एक सप्ताह का समय देते हुए 10 जुलाई तक भुगतान करने का निर्देश दिया.

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दैनिक वेतन भोगियों से जुड़ा मामला

बताया जा रहा है कि याचिकाकर्ता की अधिवक्ता राखी रानी ने हाईकोर्ट को बताया कि जल संसाधन विभाग में कई कर्मचारी लंबे समय से दैनिक वेतन भोगी के रूप में काम कर रहे थे, इस दौरान चरणबद्ध तरीके से कई कर्मचारियों की सेवा साल 2011 तक नियमित की गई. लेकिन नियमितीकरण के बाद उनकी पूर्व सेवा अवधि को पेंशन के लिए नहीं जोड़ा गया, जिसके कारण कई कर्मियों को पेंशन का लाभ नहीं मिला.

विभाग की ओर से तर्क दिया गया कि न्यूनतम आवश्यक सेवा अवधि पूरी नहीं होने के आधार पर वह पेंशन के योग्य नहीं हैं. हालांकि कर्मियों की मांग थी कि दैनिक वेतन भोगी के रूप में की गई सेवा को पेंशन लाभ के लिए गिना जाए. मामला बाद में लोक अदालत में पहुंचा, जहां दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के अनुसार लोक अदालत ने अपने अवॉर्ड में स्पष्ट निर्देश दिया कि कर्मचारियों को पूरा पेंशनरी लाभ दिया जाए और अंतर राशि का भुगतान किया जाए. सुनवाई के दौरान विभाग के कार्यपालक अभियंता ने भी इस संबंध में अंडरटेकिंग दी.

लोक अदालत के फैसले का अनुपालन नहीं

लोक अदालत में विभागीय अधिकारियों की सहमति व लिखित अंडर टेकिंग के बावजूद विभाग द्वारा अवॉर्ड को लागू नहीं किये जाने पर याचिकाकर्ताओं ने जिला कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की, लेकिन अदालत ने यह कहते हुए उसे सुनने से इनकार कर दिया कि लोक अदालत के अवॉर्ड पर कंटेम्प्ट नहीं चलाया जा सकता.

इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने अवॉर्ड के अनुपालन के लिए हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की, जिसे सिंगल बेंच ने रेस जुडीकेटा के आधार पर खारिज कर दिया. इसके खिलाफ डिवीजन बेंच में लेटर्स पेटेंट अपील (LPA) दायर की गई. डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए विभाग को स्पष्ट निर्देश दिया कि लोक अदालत के अवॉर्ड को लागू किया जाए और बकाया राशि का भुगतान अवॉर्ड की तिथि से लेकर वास्तविक भुगतान तक 6 प्रतिशत ब्याज के साथ किया जाए. अदालत ने यह भी माना कि विभाग ने जानबूझकर अवॉर्ड के अनुपालन में देरी की है.

13 जुलाई को अगली सुनवाई 

इसके बावजूद विभाग द्वारा आदेश का पालन नहीं किए जाने पर पुनः अवमानना याचिका दाखिल की गई. सुनवाई के दौरान विभाग की ओर से समय मांगा गया. अदालत ने 30 जून तक की समय सीमा तय की. फिर भी अनुपालन नहीं हुआ. जिसके बाद समय विस्तार के आग्रह को अदालत ने खारिज करते हुए जल संसाधन विभाग के सचिव प्रशांत कुमार और चीफ इंजीनियर को तलब किया. मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को निर्धारित की गई है.

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