रांची: टेंडर घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार पूर्व मंत्री आलमगीर आलम और PA संजीव लाल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया। संजीव लाल पिछले करीब दो वर्षों से जेल में बंद थे।
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सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई
मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एम.एम. सुंदरेश्वर और जस्टिस एन. कोटीश्वर सिंह की बेंच में हुई। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद संजीव लाल और पूर्व मंत्री आलमगीर आलम की जमानत मंजूर कर ली। इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने उनकी बेल याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
हाईकोर्ट से नहीं मिली थी राहत
संजीव लाल की जमानत याचिका झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत में खारिज हो गई थी। हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी। अब सर्वोच्च अदालत के आदेश के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
ईडी ने मई 2024 में किया था गिरफ्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने संजीव लाल को मई 2024 में गिरफ्तार किया था। उन पर टेंडर घोटाले के जरिए करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग करने का आरोप है। जांच एजेंसी के मुताबिक तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम के ओएसडी संजीव कुमार लाल और उनके नौकर जहांगीर आलम के ठिकानों से 32.30 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए थे।
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ईडी की छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के बाद मामले ने पूरे राज्य में राजनीतिक हलचल मचा दी थी। इसके बाद ईडी ने कार्रवाई करते हुए संजीव लाल और आलमगीर आलम को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी अब भी मामले की जांच में जुटी हुई है और टेंडर घोटाले से जुड़े कई पहलुओं की पड़ताल कर रही है।




