Tuesday, June 30, 2026

RE-NEET Exam Scam: सुरक्षा चक्र तोड़ परीक्षा में माफिया ने कैसे किए बायोमीट्रिक सिस्टम क्रैक? जाने पूरी कहानी… 

पटना: नीट-यूजी (NEET-UG 2026) पेपर लीक के बाद केंद्र और राज्य सरकारों की पूरी मुस्तैदी पेपर लीक रोकने पर टिकी थी। भारतीय वायुसेना (IAF) से लेकर पीएमओ तक पेपर को सुरक्षित रखने के लिए वॉर-रूम रणनीति पर काम कर रहे थे। लेकिन सरकार की इस अभेद्य सुरक्षा लेयर को भांपकर परीक्षा माफिया ने एक ऐसा खौफनाक प्लान-बी तैयार किया, जिसने पूरे देश के होश उड़ा दिए हैं।

पेपर लीक करने में नाकाम रहे माफिया ने इस बार परीक्षा के सबसे मजबूत सुरक्षा चक्र यानी बायोमीट्रिक वेरिफिकेशन और फेस रिकॉग्निशन सिस्टम को ही क्रैक कर दिया। इसके लिए माफिया ने फर्जी परीक्षार्थियों (सॉल्वर) को बैठाने के लिए बायोमीट्रिक जांच करने वाली कंपनी के अंदर ही अपने 200 से अधिक डमी कर्मचारियों की फौज भर्ती करा दी थी।

कैसे क्रैक हुआ बायोमीट्रिक सिस्टम? समझिए पूरा खेल

खुफिया जांच एजेंसियों और लखीसराय पुलिस की पड़ताल में इस पूरे नेक्सस की जो कड़ियां सामने आई हैं, वो बेहद चौंकाने वाली हैं:

  1. NTA से प्राइवेट वेंडर तक काम ट्रांसफर: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ( NTA ) ने अभ्यर्थियों की बायोमीट्रिक जांच का जिम्मा सरकारी उपक्रम EDCIL को दिया था। EDCIL ने इस काम को एक प्राइवेट एजेंसी इनोवेटिव व्यू कंपनी को आउटसोर्स कर दिया।

  2. डेली वेजेस (अस्थाई) स्टाफ में सेंध: इस कंपनी को परीक्षा के दिन स्थानीय स्तर पर सीसीटीवी ऑपरेटर, बायोमीट्रिक एग्जीक्यूटिव और डिवाइस हैंडलर जैसे पदों पर भारी संख्या में अस्थाई लड़कों की जरूरत थी। इन लड़कों को महज ₹400 प्रतिदिन की दिहाड़ी मिलती है।

  3. अधिकारियों से सांठगांठ: परीक्षा माफिया ने कंपनी के बड़े अफसरों से नहीं, बल्कि स्टेट लेवल पर मैनपावर सप्लाई करने वाले अधिकारियों से सेटिंग की। बिहार, यूपी, झारखंड, राजस्थान और मध्य प्रदेश के माफियाओं ने साठगांठ कर अपने 200 से अधिक भरोसेमंद लड़कों को इस कंपनी में डेली वेजेस स्टाफ के रूप में भर्ती करवा दिया।

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सॉल्वर सिंडिकेट चलाने वाले अर्पित सिंह, रविशंकर और रंजीत कुमार

एंट्री का मास्टर प्लान: 100 मीटर दूर होता था असली छात्र का वेरिफिकेशन

परीक्षा के दिन सुरक्षा बाईपास करने के लिए माफिया ने एक अचूक रणनीति अपनाई थी:

  • असली अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र के अंदर जाने के बजाय बाहर ही रुकता था।

  • सेंटर से करीब 100 मीटर दूर ही, कंपनी में तैनात माफिया के लड़के असली अभ्यर्थी का बायोमीट्रिक स्कैन और फोटो ले लेते थे।

  • इसके बाद, एडिटेड (छेड़छाड़ किए गए) एडमिट कार्ड के सहारे असली छात्र को बाहर छोड़ दिया जाता था और सॉल्वर को सीधे एग्जाम हॉल के अंदर एंट्री करा दी जाती थी।

  • एग्जाम हॉल में तैनात इनविजिलेटर को भनक न लगे, इसके लिए पूरी कमान अंदर मौजूद तकनीकी स्टाफ ( माफिया के लड़कों ) के हाथ में होती थी।

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PMCH के छात्र ने तैयार की ‘सॉल्वर गैंग’, ₹60 लाख की हुई डील

इस महाघोटाले के लिए परीक्षा माफिया ने ऐसे रईस और डॉक्टर परिवारों को टारगेट किया, जो किसी भी कीमत पर बच्चों को मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाना चाहते थे। इसके लिए ₹40 लाख से ₹60 लाख रुपये की मोटी डील की गई थी।

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पटना के PMCH में मेडिकल का छात्र अश्विनी कुमार उर्फ मयंक

सॉल्वर का इंतजाम करने की जिम्मेदारी पटना पीएमएचसी (PMCH) के मेडिकल छात्र अश्विनी कुमार को दी गई थी। अश्विनी खुद बायोमीट्रिक कर्मचारी का फर्जी आईकार्ड पहनकर सेंटर के अंदर घुसा था। उसने मधेपुरा के मंतोष, मुजफ्फरपुर के विवेक, सुपौल के हिमांश, पलामू की चंचल कुमारी, गिरिडीह की पूनम कुमारी और दिल्ली-राजस्थान के मेधावी लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर मेडिकल छात्रों को 15 से 20 लाख रुपये का लालच देकर सॉल्वर के रूप में तैयार किया था। परीक्षा से दो दिन पहले इन सभी को पटना के एक गुप्त मकान में रोककर ‘ब्रीफिंग’ भी दी गई थी।

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गैंग के ही एक सदस्य के लीक से हुआ भंडाफोड़

सरकार की इतनी बड़ी सख्ती को धता बताने वाले इस सिंडिकेट का पर्दाफाश तब हुआ, जब गिरोह के ही एक अंदरूनी सदस्य ने लखीसराय जिला प्रशासन को एक सीक्रेट मेल भेज दिया। मेल में जानकारी दी गई कि केंद्रीय विद्यालय सेंटर पर मधुप्रिया नाम की कैंडिडेट की जगह पूनम परीक्षा दे रही है।

मेल मिलते ही लखीसराय के एसपी और जिला प्रशासन तुरंत एक्शन मोड में आए। सभी केंद्रों पर जब बारीकी से री-वेरिफिकेशन किया गया, तो 9 सॉल्वर रंगे हाथों पकड़े गए। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बायोमीट्रिक कंपनी के जरिए घुसे ऐसे 18 डमी कर्मचारियों को भी गिरफ्तार कर लिया है। अब जांच एजेंसियां बिहार समेत अन्य राज्यों में फैले ऐसे 200 से अधिक संदिग्ध कर्मचारियों को ट्रैक करने में जुट गई हैं।

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गिरफ्तार किए गए आरोपी

इन मेडिकल स्टूडेंट्स की गिरफ्तारी

  1. अर्पित राज– सॉल्वर गैंग का सरगना और ANMMCH, गयाजी का छात्र।
  2. मयंक कश्यप– PMCH का छात्र।
  3. पूनम कुमारी– BHU नर्सिंग की छात्रा (मधुप्रिया के नाम से परीक्षा देते पकड़ी गई)।
  4. सौरभ झा– AIIMS रायबरेली का छात्र।
  5. अमन अग्रवाल– यूपी मेडिकल कॉलेज शाहदरा, दिल्ली (इंटर्न)।
  6. मंतोष कुमार– न्यू जलपाईगुड़ी मेडिकल कॉलेज का छात्र।
  7. विवेक कुमार– ANMMCH गयाजी का छात्र।
  8. हिमांशु कुमार– गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज सतना का छात्र।
  9. अमन अग्रवाल– UCMS, दिल्ली का छात्र।
  10. रौशन कुमार– NMCH, पटना का छात्र।
  11. चंचल कुमारी– गवर्नमेंट आयुर्वेदिक कॉलेज, ओडिशा का छात्र।
  12. संजीत और उसका भाई– सॉल्वर (संजीत NMCH नर्सिंग का छात्र)।

इन बायोमेट्रिक कर्मी और सुपरवाइजर की गिरफ्तारी

  1. बादल कुमार
  2. अंकित कुमार
  3. कृष्णा कुमार
  4. मोहित कुमार
  5. अंकित कुमार
  6. सुदर्शन कुमार
  7. मुकुंद कुमार
  8. अमलेश कुमार
  9. उदय कुमार
  10. अदिति कुमारी
  11. अखिलेश कुमार
  12. घनश्याम कुमार
  13. मयंक कश्यप
  14. शंकर कुमार वर्मा
  15. विशाल कुमार
  16. आर्यन कुमार
  17. राकेश कुमार
  18. चंदन कुमार

नोट: इस पूरे मामले पर जब समाचार माध्यमों द्वारा इनोवेटिव व्यू कंपनी का पक्ष जानने के लिए संपर्क और मेल किया गया, तो उनकी तरफ से अब तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है।

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