न्यू़ज डेस्क: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और ममता बनर्जी गुरुवार को वकील का चोगा पहनकर कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचीं। हाई कोर्ट में उनकी मौजूदगी ने राजनीतिक और कानूनी गलियारों में चर्चा तेज कर दी। जानकारी के अनुसार, ममता बनर्जी चुनाव के बाद हुई हिंसा से जुड़े एक जनहित याचिका (PIL) मामले में अदालत के सामने अपनी दलील रखेंगी।
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चीफ जस्टिस की बेंच के सामने रखेंगी पक्ष
बताया जा रहा है कि यह मामला चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा से जुड़ा है। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सुजॉय पाल की बेंच में हो रही है। उम्मीद की जा रही है कि ममता बनर्जी मामले की सुनवाई और जांच प्रक्रिया के कई पहलुओं पर सवाल उठा सकती हैं। कोर्ट परिसर में उनकी मौजूदगी को लेकर सुरक्षा के भी विशेष इंतजाम किए गए।
पहले भी सुप्रीम कोर्ट में रख चुकी हैं दलील
यह पहला मौका नहीं है जब ममता बनर्जी वकील के रूप में अदालत में नजर आई हैं। इससे पहले भी वह एसआईआर से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में दलील पेश कर चुकी हैं। ममता बनर्जी ने वर्ष 1982 में जोगेश चंद्र कॉलेज ऑफ लॉ से कानून की पढ़ाई पूरी की थी और उनके पास विधि की डिग्री भी है। जानकारी के मुताबिक, यह जनहित याचिका टीएमसी नेता और वकील वकील कल्याण बनर्जी के बेटे शीर्षान्या बंदोपाध्याय की ओर से दायर की गई थी। इस मामले को लेकर राज्य की राजनीति में पहले से ही काफी बहस चल रही है।
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चुनाव परिणाम के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार टीएमसी को बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। चुनाव में बीजेपी ने 207 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि टीएमसी को 80 सीटें मिलीं। चुनाव नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में लगातार हलचल बनी हुई है। चुनाव परिणाम आने के बाद ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि बीजेपी ने करीब 100 सीटें लूट ली हैं। वहीं बीजेपी की बड़ी जीत के बाद सुवेंदु अधिकारी ने 9 मई को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।




