मुंबई: गोरेगांव फिल्म सिटी में सोमवार को अचानक लगी आग ने पूरे सेट एरिया में अफरा-तफरी मचा दी. प्राइम फोकस स्टूडियो के अंदर बने ‘पति पत्नी और पंगा 2’ के सेट से आग की शुरुआत हुई. कुछ ही मिनटों में धुआं और लपटें तेजी से फैलने लगीं. वहां मौजूद वर्कर्स और आर्टिस्ट्स को तुरंत बाहर निकलना पड़ा और शूटिंग रोक दी गई.
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कई सेट्स तक पहुंची आग
शुरुआत में आग एक हिस्से तक सीमित थी, लेकिन जल्द ही इसने आसपास के सेट्स को भी अपनी चपेट में ले लिया. ‘रामायण’ और ‘एमटीवी हसल 5’ जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के सेट भी इससे प्रभावित हुए. दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया. राहत की बात यह रही कि किसी की जान जाने की खबर नहीं आई, लेकिन सेट्स और सामान को भारी नुकसान हुआ. इस दौरान सेट पर मौजूद लोगों ने बताया कि हालात कुछ देर के लिए पूरी तरह बेकाबू लग रहे थे. हर तरफ धुआं था और लोग जल्दी-जल्दी बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे.
सुरक्षा इंतजाम पर गंभीर सवाल
इस घटना के बाद AICWA यानी All Indian Cine Workers Association ने खुलकर नाराजगी जताई है. एसोसिएशन का कहना है कि सेट पर आग से बचाव के जरूरी इंतजाम नहीं थे. कई जगह फायर सेफ्टी के साधन मौजूद ही नहीं थे. AICWA का कहना है कि फिल्म सिटी में इस तरह के हादसे पहली बार नहीं हुए हैं.
हर साल ऐसे मामले सामने आते हैं, लेकिन फिर भी कोई बड़ा बदलाव नहीं होता. उनके मुताबिक यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि लगातार हो रही लापरवाही का नतीजा है. एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि कई प्रोड्यूसर और प्रोडक्शन हाउस खर्च बचाने के लिए सुरक्षा नियमों को नजरअंदाज कर देते हैं. यही वजह है कि छोटी सी चूक भी बड़े हादसे में बदल जाती है.
CM से जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
इस पूरे मामले को लेकर एसोसिएशन के अध्यक्ष ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis से सीधे दखल देने की अपील की है. उन्होंने कहा कि इस घटना की पूरी जांच होनी चाहिए और जो भी जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ FIR दर्ज की जाए. उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म सिटी में शूटिंग करने वाले हर प्रोडक्शन के लिए नियमित फायर सेफ्टी जांच जरूरी की जाए. सेट पर जरूरी उपकरण और सुरक्षा व्यवस्था अनिवार्य हो. जहां नियमों का पालन नहीं हो रहा, वहां लाइसेंस रद्द करने तक का कदम उठाया जाए.
वर्कर्स की सुरक्षा बड़ी चिंता
AICWA ने खास तौर पर वर्कर्स और छोटे आर्टिस्ट्स की सुरक्षा का मुद्दा उठाया है. उनका कहना है कि हादसे के वक्त सबसे ज्यादा खतरा इन्हीं लोगों को होता है. बड़े लोग तो सुरक्षित निकल जाते हैं, लेकिन काम करने वाले मजदूरों पर सीधा असर पड़ता है. उन्होंने कहा कि हर दिन हजारों लोग इन सेट्स पर काम करते हैं और उनकी जिंदगी खतरे में रहती है. ऐसे में सुरक्षा को नजरअंदाज करना बहुत बड़ी लापरवाही है.
फिल्म सिटी में लगी इस आग ने एक बार फिर सिस्टम की कमियों को सामने ला दिया है. सवाल यह है कि क्या इस बार सच में कुछ बदलेगा या फिर यह मामला भी समय के साथ ठंडा पड़ जाएगा. फिलहाल, सभी की नजर प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर है. क्योंकि यहां सिर्फ सेट नहीं जलते, बल्कि लोगों की सुरक्षा भी दांव पर होती है.


