Wednesday, June 24, 2026

मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव से जुड़े ज़मीन विवाद पर सीएमओ की आई प्रतिक्रिया, अखिलेश यादव ने भी की टिप्पणी

भोपाल :दैनिक अग्रेजी समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सीएम मोहन यादव के विधानसभा क्षेत्र और गृह जिला उज्जैन को लेकर एक बड़ा दावा किया है। इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि प्रॉपर्टी क्षेत्र मुख्यमंत्री मोहन यादव की फैमिली ने भी बड़े पैमाने पर निवेश किया है। इनमें उनके परिवार के करीबी सदस्य, भाई-बहन, चचेरे भाई-बहन शामिल हैं। इस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार के लोगों ने सरकारी योजनाओं का फायदा उठाने के लिए बड़े पैमाने पर जमीनें खरीदी हैं.

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कांग्रेस ने मामले में साधा निशाना

इसके बाद सीएम मोहन यादव कांग्रेस के निशाने पर आ गए हैं। कांग्रेस ने मंगलवार को अपने एक्स अकाउंट से पोस्ट कर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार के ख़िलाफ़ उज्जैन में ज़मीन से जुड़े करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था. कांग्रेस ने इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट शेयर करते हुए लिखा, “मोहन यादव के करीबी रिश्तेदारों ने सरकारी प्रोजेक्ट्स के आसपास करोड़ों की ज़मीनें खरीदी हैं और खूब पैसा बनाया है.”

कांग्रेस ने इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में गठित समिति से कराने के अलावा मुख्यमंत्री मोहन यादव से सार्वजनिक रूप से इन आरोपों पर अपना बयान देने व सिहंस्थ कुंभ के नाम पर हो रहे कथित भ्रष्टाचार के पीछे कौन-कौन सी कंपनियां हैं और उनका सत्ता से क्या संबंध है, इसकी भी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की.

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बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की प्रतिक्रिया

कांग्रेस के इन आरोपों के बाद मध्य प्रदेश बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की प्रतिक्रिया आई है. मध्य प्रदेश बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा, “आज कांग्रेस पार्टी द्वारा हमारे लोकप्रिय मुख्यमंत्री मोहन यादव के खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह ग़लत हैं. कांग्रेस और उसके नेता भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं. मेरा मानना है कि इन आरोपों में बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है.”

“मैं यह बताना चाहता हूं कि जब हमारे मुख्यमंत्री ने 2023 में अपना नामांकन दाखिल किया था, तब उनके पास 17 एकड़ ज़मीन थी. इस 17 एकड़ ज़मीन में कोई बदलाव नहीं हुआ है. उनकी पत्नी सीमा यादव के नाम जो 12.29 एकड़ ज़मीन थी, वह भी 2026 तक उतनी ही रही. एक सिद्धि विनायक कंपनी का आरोपों में उल्लेख किया गया है. उसके पास 2023 में 68 एकड़ ज़मीन थी, जो जून में घटकर 65 एकड़ रह गई, और मुख्यमंत्री ने 2017 में ही उसके निदेशक पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.”

मुख्यमंत्री रखेंगे अपना पक्ष 

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद भी इस मामले पर अपना पक्ष रखेंगे और जो भी उन्हें सही लगेगा, वह कार्रवाई करेंगे. उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर भी आरोप लगाया. हेमंत खंडेलवाल ने कहा, “मैं कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाना चाहता हूं कि जब-जब इस राज्य में पिछड़े वर्ग से कोई मुख्यमंत्री चुना गया है, चाहे वह उमा भारती हों, शिवराज सिंह चौहान हों या हमारे मोहन यादव, तब-तब कुछ लोगों ने उनके ख़िलाफ़ साजिश रची है और उन्हें कमज़ोर करने का प्रयास किया है.”

“मैं कांग्रेस के आरोपों का विनम्रता और दृढ़ता के साथ खंडन करता हूं. मैं उन्हें चुनौती देता हूं कि जब वे हमारे लोकप्रिय मुख्यमंत्री द्वारा किए गए विकास कार्यों की बराबरी नहीं कर पाए हैं, तो वे हमारी सरकार और मुख्यमंत्री को कमज़ोर करने के लिए ऐसी साजिशों का सहारा ले रहे हैं.”

मामले पर अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया

इधर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव पर लगे ज़मीन से जुड़े विवाद पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया दी है. अखिलेश यादव ने लखनऊ में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि मोहन यादव को बदनाम करने के लिए बीजेपी ने यह साज़िश की है.

अखिलेश यादव ने कहा, “मोहन यादव को बदनाम करने के लिए बीजेपी ने यह साज़िश की है. और अगर मोहन यादव पर ये आरोप है, तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने तो 300 से 600 एकड़ ज़मीन ली है.” उन्होंने कहा, “यह कोई नई बात नहीं है कि उन्होंने ज़मीन ली है. वे पहले रियल एस्टेट का काम करते थे. आप यह क्यों भूल जाते हैं? बीजेपी मुख्यमंत्री बदलना चाहती है, इसलिए ये आरोप लगवा रही है.”

उन्होंने आगे कहा, “वे मध्य प्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों को हटाना चाहते हैं. वे इन दोनों को इसलिए हटाना चाहते हैं क्योंकि वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को हटाना चाहते हैं. यह उन्हें हटाने की एक साज़िश है.”

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