Friday, October 30, 2026

भगवंत मान का कथित वीडियो मामले में फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने के आरोप में दो लोग हिरासत में, जानें पूरा मामला

गुरुग्राम/चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के कथित विवादित वीडियो की फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने और डिजिटल सबूतों से छेड़छाड़ करने के सनसनीखेज मामले में गुरुग्राम पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में अरुण महेंद्रू और अंकित नाम के दो आरोपियों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज उनको गिरफ्तार कर लिया है। यह पूरी कार्रवाई गुरुग्राम के सेक्टर 29 स्थित डीएलएफ पुलिस स्टेशन में दर्ज एक एफआईआर के बाद हुई है। एफ़आईआर भारतीय न्याय संहिता की धारा 111 (2) (ए), 318 (2), 319, 336 (2), 336 (3) और 340 के तहत दर्ज की गई है। इसके अलावा आईटी एक्ट 2000 की धारा 65 और 66 (D) भी लगाई गई हैं। इस घटनाक्रम के बाद श्री अकाल तख्त साहिब की बेहद तीखी प्रतिक्रिया आई है, वहीं पंजाब की पूरी विपक्षी पार्टियां एकजुट होकर मुख्यमंत्री भगवंत मान के तुरंत इस्तीफे की मांग कर रही हैं।

रिश्वत, धमकी और फर्जी लैब: कैसे खुली पोल?

यह पूरा मामला तब सामने आया जब जसप्रीत उर्फ जस्सी नाम के एक व्यक्ति ने गुरुग्राम पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जसप्रीत का आरोप है कि उन पर मुख्यमंत्री भगवंत मान के वायरल वीडियो को क्लीन चिट देने वाली एक फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने का भारी दबाव बनाया गया था। दर्ज शिकायत में जसप्रीत का ये भी आरोप है कि खुद को पंजाब सरकार का एक वरिष्ठ अधिकारी बताने वाले व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया और गुरुग्राम के एक होटल में मीटिंग के लिए बुलाया। जिसके बाद वीडियो को मुख्यमंत्री के पक्ष में मोड़ने (यह साबित करने के लिए कि वीडियो में भगवंत मान नहीं हैं) के लिए ₹10 लाख की रिश्वत दी गई। जब जसप्रीत ने इस फर्जीवाड़े पर आपत्ति जताई, तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। दबाव में आकर दो ऐसी लैब से रिपोर्ट तैयार कराई गई, जो सरकार से मान्यता प्राप्त भी नहीं थीं। रिपोर्ट तैयार होने के दौरान भी संबंधित अधिकारी लगातार उनके संपर्क में थे। वे लगातार अपनी इच्छा के मुताबिक़ रिपोर्ट तैयार कराने का दबाव बना रहे थे।

गुरुग्राम पुलिस ने किया खुलासा

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गुरुग्राम एसीपी (क्राइम) नवीन शर्मा ने की मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किए जाने की पुष्टि

गुरुग्राम के एसीपी क्राइम नवीन शर्मा ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया, “गिरफ्तार किए गए लोग डिजिटल विशेषज्ञ हैं, एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें उन्होंने कुछ फ़र्ज़ी तैयार किया था और उनके पास कोई सरकारी मान्यता प्राप्त लैब नहीं थी। जांच में यह बात सामने आई है कि पड़ोसी राज्य के कुछ अधिकारियों ने ₹10 लाख दिए थे। मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।”

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‘सिख समुदाय के साथ धोखा’: अकाल तख्त साहिब

इस फर्जीवाड़े की खबर आते ही सिख समाज की सर्वोच्च धार्मिक संस्था श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से बेहद कड़ा बयान जारी किया गया है। बयान में कहा गया कि “पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार ने श्री अकाल तख्त साहिब और सिख समुदाय के साथ धोखा करने की कोशिश की है। यह बहुत ही निम्न स्तर की राजनीति है, जिससे हर सिख और हर पंजाबी को सतर्क रहना चाहिए।” दरअसल, 15 जून को अकाल तख्त साहिब की बैठक के बाद जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने मुख्यमंत्री मान को गुरु दोखी और पंथ विरोधी घोषित किया था। इसी के बाद आम आदमी पार्टी और पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दो फॉरेंसिक रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया था कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति मुख्यमंत्री नहीं है। अब वही रिपोर्ट फर्जी निकलने से सरकार पूरी तरह घिर गई है।

Punjab CM Bhagwant Mann dismisses allegations regarding controversial video  Said Any Copying Me वो मैं नहीं, कोई मेरी नकल कर रहा है; विवादित वीडियो पर  सीएम भगवंत मान का बड़ा दावा, Punjab
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दावा किया है कि वीडियो में वो नहीं हैं

चौतरफा घिरे भगवंत मान, विपक्ष ने खोला मोर्चा

गुरुग्राम पुलिस की इस कार्रवाई के बाद पंजाब के तमाम विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर हमला बोल दिया है और उनसे नैतिक आधार पर तुरंत इस्तीफे की मांग की है। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने एक्स पर लिखा कि फर्जी लैब रिपोर्ट के पीछे की सच्चाई अब सबके सामने आ गई है। मुख्यमंत्री को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए और दोषी अधिकारियों को बर्खास्त किया जाना चाहिए। अकाली नेता बिक्रम मजीठिया ने भी सवाल उठाया कि जांच चंडीगढ़ या दिल्ली की सरकारी सीएफएसएल (CFSL) लैब से क्यों नहीं कराई गई?

Takht summons to Sukhbir: Party leaders preparing ‘justifiable’ reply |  Hindustan Times
सुखबीर बादल ने की भगवंत मान के इस्तीफ़ें की मांग

पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने अकाल तख्त को गुमराह करने और सिख भावनाओं को आहत करने का काम किया है। भगवंत मान अब मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार खो चुके हैं।

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वहीं पंजाब बीजेपी के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने इस मामले पर सीधे अरविंद केजरीवाल को घेरा। उन्होंने कहा कि अकाल तख्त साहिब को गुमराह करने के लिए सरकारी पैसे से ₹10 लाख की घूस दी गई, इस पर आज केजरीवाल चुप क्यों हैं?

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सरकार की सफाई: “निजी स्वार्थ के लिए हो रहा इस्तेमाल”

इस चौतरफा हमले और भारी विवाद के बीच पंजाब जनसंपर्क विभाग की ओर से मुख्यमंत्री भगवंत मान का एक बयान (प्रेस नोट) जारी किया गया है। मुख्यमंत्री ने अपनी सफाई में कहा, “मैंने श्री अकाल तख्त साहिब के सामने हमेशा माथा टेका है क्योंकि वह हर पंजाबी और हर सिख के लिए सर्वोच्च है, लेकिन कुछ लोग अपने निजी स्वार्थों के लिए इसका गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।” हालांकि इस पूरे मामले पर जब आम आदमी पार्टी (AAP) से उनका आधिकारिक पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उनकी तरफ से फिलहाल कोई जवाब नहीं आया है।

नोट: भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत दर्ज यह केस अब महज एक वीडियो का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि इसने पंजाब की राजनीति में एक बड़ा संवैधानिक और धार्मिक संकट खड़ा कर दिया है। आने वाले दिनों में हरियाणा पुलिस की जांच के तार पंजाब के किन बड़े अधिकारियों तक जुड़ते हैं, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

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एयर नाऊ स्पेशल

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