लखनऊ : बीते 10 मई को योगी सरकार के हुए मंत्रिमंडल विस्तार के एक सप्ताह बाद आखिरकार नए मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया गया। इसके साथ ही उन तमाम अटकलों पर विराम लग गया, जिनमें कहा जा रहा था कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बड़े विभाग लेकर नए मंत्रियों को दिए जा सकते हैं। सबसे ज्यादा चर्चा बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और समाजवादी पार्टी से बीजेपी में आए मनोज पांडे को लेकर थी।
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भूपेंद्र चौधरी को एमएसएमई विभाग
माना जा रहा था कि भूपेंद्र चौधरी को लोक निर्माण विभाग जैसा बड़ा मंत्रालय मिल सकता है, लेकिन उन्हें सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम यानी एमएसएमई विभाग सौंपा गया। एमएसएमई विभाग पहले राकेश सचान के पास था। उनके जिम्मे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के साथ खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग और हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्रालय भी थे। अब एमएसएमई विभाग भूपेंद्र चौधरी को दिए जाने के बाद राकेश सचान के पास केवल खादी एवं रेशम उद्योग विभाग ही बचा है।
वहीं, मनोज पांडे को खाद्य एवं रसद और नागरिक आपूर्ति जैसा बड़ा और सीधे जनता से जुड़ा विभाग मिला है। खाद्य रसद एवं नागरिक आपूर्ति विभाग पहले दयाशंकर मिश्र के पास था, लेकिन अब यह विभाग उनसे लेकर मनोज पांडे को दे दिया गया है। दयाशंकर मिश्र के पास अब सिर्फ आयुष विभाग रह गया है।
10 मई को हुआ था कैबिनेट विस्तार
मंत्रिमंडल विस्तार में दो कैबिनेट मंत्री, दो स्वतंत्र प्रभार मंत्री और चार राज्य मंत्रियों ने 10 मई को शपथ ली थी, जबकि विभागों का बंटवारा 17 मई को हुआ। स्वतंत्र प्रभार मंत्री बने सोमेंद्र तोमर को राजनीतिक पेंशन, सैनिक कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल विभाग मिला है। इससे पहले राज्य मंत्री रहते उनके पास ऊर्जा जैसा अहम विभाग था। वहीं, कृष्णा पासवान को पशुधन एवं दुग्ध विकास, कैलाश सिंह राजपूत को ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत, सुरेंद्र दिलेर को राजस्व और हंसराज विश्वकर्मा को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग में जिम्मेदारी दी गई है।


