नई दिल्ली : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के मंत्री पद से इस्तीफ़ा देने पर कई विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई है. जंतर-मंतर पर मंच से सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि “हमने कर दिखाया. धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा दे दिया है.” उन्होंने कहा, “धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा तो हो गया और ये इस्तीफ़ा इस बात का गवाह है कि अगर आप लोग डरेंगे नहीं और सरकार के सामने झुकेंगे नहीं तो अच्छे अच्छों के हम इस्तीफ़े ले सकते हैं.”
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राहुल गांधी ने कहा
लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़ा पर कहा, “धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हमारे शिक्षा व्यवस्था को फिर से संवारने की दिशा में बहुत बड़ा कदम है। शाबाश देश भर के छात्रों, आप सभी पर गर्व है। सड़कों पर आ कर लोकतंत्र, संविधान और अपने भविष्य की रक्षा में डट कर खड़े होने वाले हर एक युवा, हर छात्र को बहुत-बहुत बधाई।”
आगे उन्होंने लिखा, “2 मांगें अभी भी बाकी हैं – प्रधानमंत्री छात्रों और भारत के भविष्य को सम्मान देते हुए माफ़ी मांगें और छात्रों पर हिंसा के दोषियों पर कार्रवाई हो। ये समाज के दूसरे वर्गों किसानों, मजदूरों, गरीबों, हर वो व्यक्ति जिसे इस सरकार ने दबाया है, कुचला है – अपने सम्मान के लिए संवैधानिक तरीके से डटकर खड़े होने में ही असली साहस है। इस सरकार को हटाने का वक्त आ गया है। डरो मत!”
पार्टी धर्मेंद्र प्रधान के साथ : नितिन नबीन
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने पर बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने कहा कि पार्टी धर्मेंद्र प्रधान के साथ खड़ी है. एक्स पर उन्होंने पोस्ट में लिखा, “केंद्रीय शिक्षा मंत्री के तौर पर, धर्मेंद्र प्रधान जी ने भारत के शिक्षा के माहौल को सुधारने और ऐतिहासिक नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 को सफलतापूर्वक लागू करने में अहम भूमिका निभाई। बड़े हितों को प्राथमिकता देते हुए, पद छोड़ने का उनका फैसला सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और निस्वार्थ सेवा के सबसे ऊंचे स्टैंडर्ड को दिखाता है। पार्टी इस फैसले में धर्मेंद्र प्रधान जी के साथ पूरी तरह खड़ी है। मैं उनके आगे के कामों के लिए शुभकामनाएं देता हूं।”
‘यह लोकतंत्र की जीत है
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े को लोकतंत्र की जीत बताया है. उन्होंने एक्स पर लिखा, “यह लोकतंत्र की जीत है, लोकतंत्र की जीत, जो सीधे सड़कों से आई है. यह शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत है. कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और देश की ‘जेन ज़ी’ को बधाई.” उन्होंने लिखा, “साथ ही, उन सभी नागरिकों का भी धन्यवाद जिन्होंने डर और डर के डर को त्यागकर देश के हर कोने से आवाज़ उठाई.” उन्होंने आखिर में लिखा, “जवाबदेही से अब सुधार की ओर.”
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स पर लिखा है कि ये करोड़ों युवाओं की जीत है. उन्होंने लिखा, “भारत के ‘छात्रों की गूँज’ आख़िरकार अंहकारी सत्ता की दहलीज़ तक पहुँच गई. ये हमारे करोड़ों युवाओं की जीत है जिन्होंने देशभर में शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सड़क पर आवाज़ उठाई. ये सत्य की जीत है और मोदीजी के हठ की हार है. ये उन सभी परिवारों की जीत है जिन्होंने अपने ख़ून, अपने बच्चों को खोया, क्योंकि यह सरकार भ्रष्टाचारी है. ये साझा विपक्ष की जीत है, जिन्होंने छात्रों के हित में संसद से सड़क तक आवाज़ उठाई.”
प्रियंका गांधी ने कहा
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड में कहा, “ये वो दिन है जब हमारे देश के युवा और स्टूडेंट्स वापस अपने देश को अपने हाथों में लेना शुरू कर रहे हैं. उन्होंने साबित किया है कि जब भी आप अहिंसक तरीक़े से हिम्मत के साथ खड़े होते हैं तो चाहे सामने कोई भी हो आप जीतते हैं.”
अखिलेश यादव ने कहा
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि ये नई पीढ़ी की जीत है और सरकार को इस बात को समझ लेना चाहिए कि प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक गंभीरता से सोचना होगा.
मनीष सिसोदिया ने कहा
आम आदमी पार्टी नेता मनीष सिसोदिया ने कहा है कि “धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा भेजा नहीं है बल्कि देश के बच्चों और छात्रों ने इस्तीफ़ा ले लिया है, मोदी जी की ओर से इस्तीफ़ा लेना तब कहा जाता जब नीट पेपर घोटाला हुआ और 22 बच्चों ने आत्महत्या की तब मोदी जी ज़िम्मेदार प्रधानमंत्री होते इस्तीफ़ा लेता.” “जेन ज़ी ने अहंकारी प्रधानमंत्री को मजबूर किया है कि वो अपने भ्रष्टाचारी शिक्षा मंत्री को उसके पद से हटाएं.”
भूपेंद्र सिंह हुड्डा का बयान
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि देर आए दुरुस्त आए, अगर पहले आ जाते तो ये नुकसान न होता, युवा पीढ़ी का एग्ज़ाम से भरोसा उठा चुका है और पूरा सिस्टम बदलना चाहिए और नया सिस्टम आना चाहिए.


