Friday, July 24, 2026

चोल राजवंश की धरोहर की भारत वापसी: PM की मौजूदगी में नीदरलैंड ने सौंपा ऐतिहासिक ताम्रपत्र

न्यूज डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नीदरलैंड के राजा विलेम-अलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा से मुलाकात की। यह बैठक हेग के रॉयल पैलेस में आयोजित हुई। इस दौरान दोनों देशों के बीच डिजिटल तकनीक, नवाचार, फिनटेक और ब्लू इकोनॉमी पर गहन चर्चा हुई। इस दौरान भारत को चोल काल के ऐतिहासिक ताम्रपत्र मिले हैं।

भारत के लिए एक और ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण पल आया, जब नीदरलैंड ने 11वीं सदी के चोल राजवंश के 21 ऐतिहासिक ताम्रपत्र भारत को वापस सौंप दिए। प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में हुए इस कार्यक्रम ने दोनों देशों के सांस्कृतिक रिश्तों को एक नया आयाम दिया है। भारत साल 2012 से ही इन बहुमूल्य ताम्रपत्रों को वापस लाने की कोशिश में जुटा था, जिन्हें नीदरलैंड में लाइडेन प्लेट्स के नाम से भी जाना जाता है।

लगभग 30 किलो वजनी इन ताम्रपत्रों को चोल वंश का सबसे महत्वपूर्ण जीवित रिकॉर्ड माना जाता है, जो हिंदू सम्राट राजराजा चोल प्रथम और उनके पुत्र राजेंद्र चोल के काल के हैं।

इन पर संस्कृत और तमिल भाषा में बौद्ध मठ को दिए गए दान का विवरण दर्ज है और इन्हें जोड़ने वाले कांस्य के छल्ले पर चोल वंश की शाही मुहर लगी है। इन्हें 1700 के दशक में एक ईसाई मिशनरी नीदरलैंड ले गया था, जिसे अब लंबी अंतरराष्ट्रीय बातचीत और पीएम मोदी के सफल दौरे के बाद डच सरकार ने ससम्मान भारत को लौटा दिया है।

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एयर नाऊ स्पेशल

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