रांची: विश्वविख्यात छऊ नृत्य कला के संरक्षण और कलाकारों के सम्मान को लेकर सरायकेला नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने बुधवार को झारखंड सरकार के कला, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू से शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और छऊ नृत्य कला के पुनर्जीवन को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
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कलाकारों की समस्याएं
बैठक के दौरान नगर पंचायत अध्यक्ष ने कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव मुकेश कुमार और कला संस्कृति निदेशक आशिक अकरम के समक्ष स्थानीय कलाकारों की समस्याओं और सरायकेला की सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि छऊ नृत्य केवल एक लोक कला नहीं, बल्कि झारखंड और देश की सांस्कृतिक पहचान है। मुलाकात में राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र के पुनर्जीवन की मांग भी उठाई गई। नगर पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र का नियमित संचालन शुरू किया जाए और छऊ नृत्य व वाद्य यंत्रों के प्रशिक्षकों की जल्द नियुक्ति की जाए, ताकि नई पीढ़ी को इस कला से जोड़ा जा सके।
पेंशन और सुविधाओं की मांग
बैठक में आर्थिक रूप से कमजोर और वृद्ध छऊ कलाकारों के लिए सम्मानजनक पेंशन योजना लागू करने की मांग भी की गई। साथ ही युवा कलाकारों को प्रशिक्षण, वाद्य यंत्र और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। नगर पंचायत अध्यक्ष ने सरायकेला को छऊ ग्राम के रूप में विकसित करने का सुझाव भी दिया। उनका कहना था कि इससे सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय कलाकारों को रोजगार और पहचान दोनों मिल सकेंगे।
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सरकार ने दिया सकारात्मक आश्वासन
कला संस्कृति मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि छऊ नृत्य झारखंड की गौरवशाली पहचान है और सरकार कलाकारों के हितों को लेकर गंभीर है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मांग पत्र की विभागीय समीक्षा कर जल्द जरूरी कदम उठाए जाएंगे। नगर पंचायत अध्यक्ष की इस पहल का स्थानीय कलाकारों ने स्वागत किया है। कलाकारों का कहना है कि लंबे समय से उपेक्षा झेल रही छऊ कला को अब नई उम्मीद मिली है और सरकार की पहल से इस पारंपरिक कला को नई पहचान मिल सकती है।


