नई दिल्ली : दिल्ली हाईकोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो की याचिका पर कोई अंतरिम राहत नहीं दी है. रविवार को दोपहर ढाई बजे हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक को निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की याचिका को खारिज कर दिया है. यानी अनशन कर रहे सोनम वांगचुक फिलहाल दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में ही भर्ती रहेंगे.
Highlights:
इसे भी पढ़ें : जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन टी-20 मैचों की सिरीज खेलने टीम इंडिया नए कोच के साथ हुई रवाना
कपिल सिब्बल ने रखी दलील
गीतांजलि जे. आंग्मो की याचिका दिल्ली हाईकोर्ट में सवा घंटे तक सुनवाई चली और अदालत ने सरकार के फैसले को सही करार दिया. कोर्ट में सुनवाई के दौरान गीतांजलि की ओर से पेश हुए कपिल सिब्बल ने ‘माय बॉडी माय चॉइस’ वाली दलील दी. उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक को अधिकार है कि वह किस डॉक्टर और किस अस्पताल में इलाज कराना चाहते हैं.
इस पर सरकार की तरफ से असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने दलील दी कि राष्ट्रपति का इलाज भी सरकारी अस्पताल में ही होता है. ऐसे में प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट किए जाने जैसी मांग सही नहीं है. इस दौरान यह भी बताया गया कि सफदरजंग अस्पताल में सोनम वांगचुक से पत्नी व परिवार के मिलने पर कोई रोक नहीं है.
अस्पताल में रखना कितना जरूरी
इससे पहले हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान सवाल किया कि क्या सोनम वांगचुक को तुरंत अस्पताल में भर्ती करने की कोई जरूरी वजह है. इस पर असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने जवाब देते हुए कहा, “उमस भरे मौसम में 18 दिन तक उपवास करने से किसी भी सामान्य शख्स के शरीर में डिहाइड्रेशन हो सकता है और कीटोसिस की समस्या हो सकती है.”
वहीं कोर्ट को एम्स के एक डॉक्टर ने बताया कि सोनम वांगचुक को बिना चीनी वाली कुछ ओरल दवाएं और ORS दिया गया, क्योंकि वह न तो कोई नस के जरिए दवाएं ले रहे हैं और न ही चीनी या विटामिन वाले सप्लीमेंट. उन्होंने कहा कि वांगचुक कीटोसिस की स्थिति में हैं और डिहाइड्रेटेड हैं, इसलिए उन्हें कार्बोहाइड्रेट और विटामिन की जरूरत है.


