रांची: भारतीय जनता पार्टी के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा (PT) में हुई कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को लेकर झारखंड सरकार तथा झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया है और राज्य की कांग्रेस समर्थित झारखंड मुक्ति मोर्चा सरकार युवाओं के अधिकारों की रक्षा करने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने घोषणा की कि 22 जुलाई को हजारों की संख्या में युवा कार्यकर्ता JPSC कार्यालय का घेराव करेंगे।
Highlights:
इसे भी पढ़ें : झारखंड सरकार ने 1997 बैच की IPS सुमन गुप्ता को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए जारी एनओसी को किया रद्द
युवाओं से शामिल होने की अपील
उन्होंने राज्य के सभी युवाओं, प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों एवं जागरूक नागरिकों से इस आंदोलन में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि यह संघर्ष केवल एक परीक्षा का नहीं, बल्कि झारखंड के युवाओं के भविष्य, पारदर्शी भर्ती व्यवस्था और न्याय की लड़ाई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि युवा इस जनआंदोलन को सफल बनाकर सरकार को जवाब देने का कार्य करेंगे।
अभ्यर्थियों के मन में गंभीर शंकाएँ
आदित्य साहू ने कहा कि 14वीं JPSC PT परीक्षा के परिणाम जारी होने के बाद अभ्यर्थियों के मन में गंभीर शंकाएँ उत्पन्न हुई हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराई गई मार्कशीट पर संबंधित अधिकारियों के हस्ताक्षर तक नहीं हैं। यह न केवल प्रशासनिक लापरवाही का प्रमाण है, बल्कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
नहीं दिया जा रहा OMR
उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) के तहत OMR उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां माँगे जाने के बावजूद उन्हें उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। आयोग की वेबसाइट पर भी आवश्यक अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं तथा परीक्षा परिणाम पर आयोग के सदस्यों के हस्ताक्षर का अभाव है। इससे स्पष्ट होता है कि पूरी प्रक्रिया संदेह के घेरे में है और राज्य सरकार भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रही है।
युवाओं संग भद्दा मजाक
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि लाखों युवाओं ने वर्षों की कठिन मेहनत, संघर्ष और उम्मीदों के साथ इस परीक्षा में भाग लिया, लेकिन सरकार ने उनकी मेहनत और सपनों के साथ भद्दा मजाक किया है। यह केवल एक परीक्षा में अनियमितता का मामला नहीं, बल्कि झारखंड के युवाओं के भविष्य को अंधकार की ओर धकेलने का गंभीर प्रयास है।


