रांची: हजारीबाग में सैकड़ों एकड़ वन भूमि की अवैध खरीद-बिक्री से जुड़े मामले में दायर जनहित याचिका को झारखंड हाईकोर्ट ने सोमवार को खारिज कर दिया. मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एम. एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि इस जनहित याचिका को दाखिल करने के लिए याचिकाकर्ता की ओर से पर्याप्त विश्वसनीयता (क्रेडेंशियल) स्थापित नहीं कर सके. कोर्ट ने याचिकाकर्ता की मंशा और विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए. कोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार यह जनहित याचिका शिव शंकर शर्मा की ओर से दायर की गई थी.
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दायर याचिका में आरोप
दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि हजारीबाग में सैकड़ों एकड़ वन भूमि बिना वैध सेल डीड के बेच दी गई है. याचिका में पूरे मामले की CBI से जांच कराने की मांग की गई थी. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता विभोर मयंक ने पक्ष रखते हुए कोर्ट को बताया कि सरकार ने इस मामले में जांच की आवश्यक कार्रवाई एसीबी को सौंप चुकी है और मामले में कई आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई है, ऐसे में केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराने की कोई आवश्यकता नहीं है.
कोर्ट का हस्तक्षेप से इंकार
कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से अब तक उठाए गए कदमों पर संतोष जताते हुए इस स्तर पर किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया. साथ ही याचिका को खारिज करते हुए कोई अन्य आदेश देने की जरूरत नहीं है.




