हजारीबाग: हजारीबाग के पूर्व डीसी और आईएएस अधिकारी विनय चौबे को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सेवायत भूमि की कथित अवैध खरीद-बिक्री से जुड़े मामले में सोमवार को सुनवाई करते हुए अदालत ने उन्हें सशर्त जमानत दे दी।सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के बाद कोर्ट ने विनय चौबे को जमानत देने का फैसला सुनाया। कोर्ट ने जमानत के साथ कुछ शर्तें भी लगाई हैं।
Highlights:
देश छोड़ने और गवाहों से संपर्क पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि विनय चौबे बिना अनुमति देश नहीं छोड़ सकते और उन्हें मामले से जुड़े गवाहों से दूरी बनाए रखनी होगी। इन शर्तों का पालन करना उनके लिए अनिवार्य होगा। इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने 6 जनवरी को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की पीठ ने उस समय उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
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पिछले साल दर्ज हुआ था मामला
यह मामला अगस्त 2025 में दर्ज किया गया था। एसीबी ने इस संबंध में कांड संख्या 9/2025 के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच के बाद एसीबी द्वारा इस मामले में चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है। विनय चौबे पर हजारीबाग में सेवायत भूमि की अवैध खरीद-बिक्री में शामिल होने का आरोप है। इस मामले में उन्हें जेल जाना पड़ा था और वे काफी समय से न्यायिक हिरासत में थे।
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जमानत से मिली बड़ी राहत
सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद विनय चौबे को बड़ी राहत मिली है। हालांकि, मामले की सुनवाई अभी जारी रहेगी और आगे की कानूनी प्रक्रिया भी जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से जहां विनय चौबे को राहत मिली है, वहीं यह मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। आने वाले समय में अदालत में सुनवाई के दौरान इस मामले में और भी अहम पहलू सामने आ सकते हैं।


