रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने इंस्टिट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज में अगले सत्र के लिए छात्रों के नामांकन पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने संस्थान में बुनियादी सुविधाओं और शिक्षकों की कमी को गंभीर मानते हुए यह फैसला सुनाया।
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क्या हैं आरोप?
मामले की सुनवाई जस्टिस आनंद सेन की अदालत में हुई। याचिकाकर्ता अंबेश कुमार चौबे एवं अन्य ने संस्थान की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया कि संस्थान में फिलहाल 418 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन वहां पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं। इसके अलावा संस्थान के पास न तो खुद की लाइब्रेरी है और न ही खेल का मैदान। कानून से जुड़ी जरूरी किताबों की भी कमी बताई गई है।
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बार काउंसिल के नियमों का उल्लंघन
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अनूप कुमार अग्रवाल ने कोर्ट को बताया कि इंस्टिट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज बार काउंसिल ऑफ इंडिया के बायलॉज के अनुसार संचालित नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि इससे वहां पढ़ रहे छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अगले सत्र में नए छात्रों के नामांकन पर रोक लगाने का आदेश दिया। कोर्ट का मानना है कि जब तक संस्थान आवश्यक मानकों को पूरा नहीं करता, तब तक नए छात्रों का दाखिला उचित नहीं होगा। इस फैसले के बाद संस्थान में पढ़ रहे छात्रों के भविष्य को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कोर्ट के इस कदम को शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।


