Sunday, September 13, 2026

दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा, ‘शांतिपूर्ण नहीं था 20 जुलाई को हुआ छात्रों का प्रदर्शन…’,

नई दिल्ली : 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज और 18 जुलाई को जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को जबरन हटाए जाने से संबंधित जनहित याचिकाओं पर बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. हाईकोर्ट ने सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने से संबंधित करने व पुलिस की कार्रवाई को अवैध घोषित करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया.

चीफ जस्टिस देवेन्द्र उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच में हुई सुनवाई में कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करते हुए चार हफ्ते में जवाब मांगा. इस मामले में अब 11 सितंबर को अगली सुनवाई होगी. हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को बॉडी कैमरा फुटेज और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का भी आदेश दिया.

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जिम्मेदार अधिकारियों पर हो कार्रवाई

याचिकाकर्ता की तरफ से वकील एन हरिहरन ने कहा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण चल रहा था. कोई वॉर्निंग नहीं दी गई और लाठीचार्ज कर दिया गया. ऐसा तो कोलोनियल टाइम मे भी नहीं हुआ था. राज्य की कोई भी कार्रवाई, यदि होती है तो उसे आर्टिकल 14 के तहत मनमानी की कसौटी पर परखा जाएगा. यह ऐसी स्थिति है जहां सबसे बड़े स्तर पर क्रूरता का प्रयोग किया गया है. उन्होंने कहा कि छात्राओं के साथ छेड़छाड़ हुई. जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.

20 तारीख तक कोई हिंसा नहीं

वहीं, वकील विकास सिंह ने कहा कि प्रदर्शनकारी लगभग 20 दिनों से यही जुटे रहे. जबकि सोनम वांगचुक ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि 20 तारीख को वे संसद की ओर मार्च करेंगे. 20 जुलाई तक कोई हिंसा नहीं हुई. आज तक इस बात की कोई चर्चा तक नहीं है कि वहां एकत्रित लोगों ने हिंसा की हो. ऐसे वीडियो हैं जिनमें सादी वर्दी (सिविल कपड़ों) में लोग लाठियां लिए दिख रहे हैं और उन्होंने पुलिस के साथ मिलकर उन प्रदर्शनकारियों पर हमला किया है. पुलिस किसी तरह से स्थिति को संभाल पा रही है.

पुलिसवालों के खिलाफ हो FIR

याचिकाकर्ता के वकील हरिहरन ने आगे कहा कि वहां लाठियां हैं, उनमें कीलें लगी हैं जिनसे बच्चों को पीटा गया. कम से कम पहचाने जा सकने वाले पुलिसवालों के खिलाफ FIR दर्ज होनी चाहिए. यह सब वीडियो में है. पूरी घटना की इंक्वायरी होनी चाहिए. 90 से ज़्यादा स्टूडेंट घायल हुए हैं. कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसियों को क्या कोड ऑफ़ कंडक्ट बनाए रखना है, इस बारे में दिशा निर्देश दिए जाने चाहिए. हम CCTV फुटेज, वीडियो, पुलिस के बल प्रयोग के निर्देश, आंसू गैस, डंडे वगैरह समेत सभी सामान को सुरक्षित रखने की भी मांग कर रहे हैं क्योंकि हम हाई लेवल जांच भी चाहते हैं.

हिंसा होने पर पुलिस कार्रवाई को मजबूर

वहीं केंद्र सरकार की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने कहा कि ऐसे वीडियो हैं जिनमें पुलिसकर्मी घायल दिख रहे हैं. तथाकथित शांतिपूर्ण आंदोलन शांतिपूर्ण नहीं रहा. ऐसे प्रदर्शनों को दूसरे लोग हाईजैक कर लेते हैं. पुलिस की गाड़ियों को नुकसान हुआ. पुलिसवाले घायल हुए. FIR भी तब दर्ज की जाती है जब भीड़ बेकाबू हो जाती है. अगर हिंसा होती है तो पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ती है.

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