रांची : झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी की अध्यक्षता में मंगलवार को राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) की शासी परिषद की बैठक में संस्थान के शैक्षणिक, चिकित्सा, मानव संसाधन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में नर्सिंग, पैरामेडिकल एवं अन्य स्वीकृत रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया को गति देने के लिए सभी लंबित विज्ञापनों के शीघ्र प्रकाशन का निर्णय लिया गया।
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बैठक में राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) द्वारा रिम्स में एमबीबीएस सीटों की संख्या 180 से बढ़ाकर 250 किए जाने पर रिम्स प्रबंधन, संकाय सदस्यों एवं सभी कर्मियों को बधाई दी गई तथा इसे झारखंड की स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया गया।
इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के अंतर्गत पीपीपी मॉडल पर यूजी छात्रावास के नवीनीकरण एवं पीजी छात्रावास के निर्माण, नए ओपीडी कॉम्प्लेक्स के लिए स्थल चयन, पेयजल सुविधा हेतु आरओ सिस्टम की स्थापना तथा लिफ्टों के वार्षिक अनुरक्षण (AMC) का दायित्व बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन विभाग को सौंपने का निर्णय लिया गया।
मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण के लिए फार्मासिस्ट एवं लैब तकनीशियन पदों पर प्रतिनियुक्ति के माध्यम से नियुक्ति, एनेस्थीसिया तकनीशियन कैडर के पुनर्गठन एवं नियुक्ति, मेडिकल ऑफिसर प्रतीक्षा सूची के अभ्यर्थियों की नियुक्ति समिति के समक्ष उपस्थिति तथा मनोचिकित्सा काउंसलर एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मियों की सेवा अवधि एक वर्ष बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
बैठक में आयुष्मान भारत नोडल ऑफिसर एवं केंद्रीय प्रयोगशाला प्रभारी को विभागाध्यक्षों के समान ₹5 लाख का कॉर्पस फंड उपलब्ध कराने, आयुष्मान भारत योजना से प्राप्त राशि के वितरण हेतु विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने तथा रेडियोथेरेपी उपकरणों की खरीद के लिए कैबिनेट अनुमोदन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
इसके अतिरिक्त, पिछले स्थायी वित्त समिति (SFC) में एक करोड़ रुपये से अधिक की खरीद से संबंधित मामलों की सूची तैयार करने, PTA एवं BERA की दरें निर्धारित करने, एपीएस मानदंडों को GRIEVANCE समिति द्वारा निर्धारित करने, “दवाई दोस्त” के लिए स्थान उपलब्ध कराने, एल-1 स्तर तक पहुंच चुके उपकरणों की खरीद के आदेश निर्गत करने तथा निजी अस्पतालों से रेफरल के मामलों में निर्धारित एसओपी का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का भी निर्णय लिया गया। शासी परिषद ने इन निर्णयों को रिम्स में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा, प्रशासनिक दक्षता तथा मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।


