Monday, June 29, 2026

कोलकाता हाईकोर्ट में RG KAR मामले से जस्टिस मंथा ने खुद को सुनवाई से किया अलग

न्यूज डेस्क: कोलकाता के चर्चित आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की महिला डॉक्टर से दुष्कर्म और हत्या मामले में सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस राजशेखर मंथा की बेंच ने मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है. अदालत ने कहा कि कोर्ट में मामलों की संख्या अधिक है और इस संवेदनशील केस को पर्याप्त समय देने वाली बेंच के सामने सुनवाई होना न्यायहित में होगा. हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार इस मामले को लेकर न्यायिक आयोग गठित कर सकती है. वहीं, केंद्रीय जांच ब्यूरो ने इस केस में अपनी स्टेटस रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया है.

दोषी से फिर हो सकती पुछताछ

पिछली सुनवाई में जस्टिस मंथा की बेंच ने कहा था कि जरूरत पड़ने पर सीबीआई दोषी और अन्य संदिग्धों से पूछताछ की जा सकती है. वहीं अदालत ने स्पष्ट किया था कि जांच को आगे बढ़ाने के लिए एजेंसी किसी भी व्यक्ति से पूछताछ करने के लिए स्वतंत्र है. इसी के आधार पर सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट दाखिल की.

मार्च 2025 में जस्टिस देबांग्शु बसाक की डिवीजन बेंच ने भी पीड़िता परिवार की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था. अदालत ने समय की कमी का हवाला दिया और कहा कि वह मामले को पर्याप्त समय नहीं दे पा रही है. वहीं पीड़ित परिवार ने जल्द सुनवाई की मांग की थी, लेकिन पूरी सुनवाई संभव नहीं हुई.

इसे भी पढ़े: रिम्स जमीन घोटाला मामले में ACB ने हाई कोर्ट में दाखिल किया जवाब, 14 मई को अगली सुनवाई

आरोपी को उम्रकैद की सजा

गौरतलब है कि 9 अगस्त 2024 को आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला डॉक्टर का शव मिला था. इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. इस मामले में कोलकाता पुलिस ने अगले ही दिन सिविक वॉलंटियर संजय रॉय को गिरफ्तार कर लिया था.

जिसके बाद कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी. लंबी जांच और सुनवाई के बाद 18 जनवरी 2025 को सियालदह कोर्ट ने आरोपी संजय रॉय को दोषी करार दिया था. इसके बाद 20 जनवरी 2025 को जज अनिर्बाण दास ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी.

कोलकाता हाईकोर्ट में केस लंबित 

सियालदह कोर्ट के फैसले से पहले ही पीड़िता के माता-पिता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी और सीबीआई की जांच पर कई सवाल भी उठाए. यह याचिका पहले जस्टिस तीर्थंकर घोष की बेंच में गई, लेकिन उन्होंने मामले की सुनवाई से इनकार कर दिया क्योंकि उस समय सुप्रीम कोर्ट में भी केस की सुनवाई चल रही थी.

जिसके बाद पीड़ित परिवार सुप्रीम कोर्ट पहुंचे. वहां तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने सवाल उठाया कि एक ही याचिका पर दो अदालतों में सुनवाई क्यों हो. सुप्रीम कोर्ट ने मामले को हाईकोर्ट में सुनने की बात कही, जिसके बाद से यह केस लगातार कोलकाता हाईकोर्ट में लंबित है.

spot_img

एयर नाउ स्पेशल

नेहरू से मोदी तक भारत के प्रधानमंत्री की पूरी...

न्यूज डेस्क: 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ और संसदीय लोकतंत्र की स्थापना हुई। देश के शासन की कमान प्रधानमंत्री के हाथों में...
- Advertisement -spot_img

सोशल मीडिया

25,000FansLike
33,000FollowersFollow
500FollowersFollow
112,000SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

ट्रेंडिंग खबर