Thursday, October 29, 2026

झारखंड परिसीमन: ‘आदिवासी सीटें घटीं तो बर्दाश्त नहीं’- बंधु तिर्की, रांची में जुटे कई दल; 2 अगस्त को महा-आंदोलन का एलान

रांची: झारखंड में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के प्रस्तावित परिसीमन ( Delimitation ) को लेकर सियासी पारा अचानक गरमा गया है। राँची के करमटोली स्थित प्रेस क्लब में आयोजित एक आपातकालीन सर्वदलीय बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों और आदिवासी संगठनों ने एकजुट होकर केंद्र सरकार के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है। बैठक में साफ चेतावनी दी गई कि यदि परिसीमन के बहाने झारखंड में अनुसूचित जनजातियों ( ST ) की आरक्षित सीटों में एक भी सीट की कटौती की गई, तो पूरा राज्य उग्र जनआंदोलन की आग में झुलस जाएगा।

सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक चली इस बैठक की अध्यक्षता पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने की, जिसमें कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, भाकपा (माले) और भारतीय आदिवासी पार्टी समेत कई संगठनों के नेता और कार्यकर्ता जुटे।

“सीटें फ्रीज करो या आबादी के अनुपात में बढ़ाओ”

बैठक में नेताओं ने जनसांख्यिकीय बदलाव को लेकर गहरी चिंता जताई। वक्ताओं का कहना था कि झारखंड में तेजी से हुए औद्योगीकरण और शहरीकरण के कारण बाहरी आबादी बढ़ी है, जिससे आदिवासियों का जनसंख्या प्रतिशत प्रभावित हुआ है। इस असंतुलित आंकड़े के आधार पर परिसीमन करना सीधे तौर पर आदिवासियों को राजनीतिक रूप से हाशिए पर धकेलना होगा।

बैठक में सर्वसम्मति से मुख्य रूप से दो मांगें रखी गईं। पहली ये कि वर्तमान में अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित लोकसभा और विधानसभा सीटों को यथावत सुरक्षित रखा जाए। दूसरी ये कि यदि परिसीमन के बाद राज्य में कुल सीटों की संख्या बढ़ती है, तो संविधान के अनुच्छेद 330(2) और 332(3) के तहत आदिवासियों की सीटें भी उसी अनुपात में बढ़ाई जाएं।

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दिग्गजों ने भरी हुंकार: किसने क्या कहा?

  • पूर्व मंत्री बंधु तिर्की: “आदिवासी समाज अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी से कोई समझौता नहीं करेगा। यह हमारे संवैधानिक अधिकारों और पाँचवीं अनुसूची पर हमला है। इसके खिलाफ 2 अगस्त 2026 को राँची में आदिवासी एकता महाजुटान रैली होगी, जो इतिहास लिखेगी।”
  • प्रेमसाही मुंडा (भारतीय आदिवासी पार्टी): उन्होंने बाहरी आबादी के प्रभाव का हवाला देते हुए वर्तमान सीटों को पूरी तरह से सुरक्षित करने की मांग उठाई।

  • सुविन्दु सेन (भाकपा-माले): उन्होंने कहा कि उनका संगठन आदिवासियों के इस हक की लड़ाई में सड़क पर उतरने को तैयार है और वे 2 अगस्त की रैली का पूर्ण समर्थन करते हैं।

  • राजेश लिंडा (आम आदमी पार्टी): उन्होंने स्पष्ट किया कि वे परिसीमन की प्रक्रिया के विरोधी नहीं हैं, लेकिन यह प्रक्रिया आदिवासी हितों को ध्यान में रखकर ही होनी चाहिए।

  • राजीव रंजन प्रसाद (प्रदेश महासचिव, कांग्रेस): उन्होंने कहा कि झारखंड के सांस्कृतिक और संवैधानिक हितों की रक्षा कांग्रेस की सर्वोच्च प्राथमिकता है, पहचान से खिलवाड़ मंजूर नहीं।

2 अगस्त को रांची में आदिवासियों का महाजुटान

सामाजिक कार्यकर्ता शशि पन्ना और अनिल अमिताभ पन्ना ने कहा कि यह लड़ाई किसी एक दल की नहीं बल्कि पूरे झारखंड के वजूद की है। पाँचवीं अनुसूची और पेसा (PESA) कानून की भावना के खिलाफ जाकर कोई भी निर्णय आदिवासियों को स्वीकार्य नहीं होगा।

बैठक का समापन एक सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। सभी दलों ने निर्णय लिया है कि वे गांव-गांव जाकर जनजागरण अभियान चलाएंगे और आगामी 2 अगस्त 2026 को राँची के ऐतिहासिक मैदान में लाखों की भीड़ जुटाकर अपनी ताकत का अहसास कराएंगे।

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एयर नाऊ स्पेशल

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