Sunday, June 28, 2026

झारखंड शराब घोटाला: ED की राडार पर पूर्व मंत्री रामेश्वर उरांव और बेटा, IAS अमित प्रकाश; सभी को भेजा समन

रांची: झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियों का शिकंजा एक बार फिर कसता जा रहा है। राज्य के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ( ED ) ने अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है। मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच कर रही ED ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव, उनके बेटे रोहित उरांव और आबकारी विभाग के रिटायर्ड कमिश्नर व आईएएस अधिकारी अमित प्रकाश को सीधे पूछताछ के लिए समन जारी किया है।

सभी संबंधितों को तय तारीख पर रांची स्थित ED के क्षेत्रीय कार्यालय में हाजिर होने का निर्देश दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी ने उन्हें सिर्फ बयान दर्ज कराने के लिए नहीं बुलाया है, बल्कि अपने साथ तमाम बैंक स्टेटमेंट्स, संपत्तियों के ब्योरे और नीतिगत फैसलों से जुड़े प्रशासनिक दस्तावेज भी लाने को कहा है।

छत्तीसगढ़ सिंडिकेट और रोहित उरांव पर टिकी नजर

ED की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई के केंद्र में झारखंड की नई शराब नीति और उसके जरिए उपकृत की गईं कुछ बाहरी कंपनियां हैं। जांच एजेंसी को पुख्ता संदेह है कि नियमों को ताक पर रखकर छत्तीसगढ़ के शराब सिंडिकेट और कुछ खास निजी प्लेसमेंट एजेंसियों को झारखंड के बाजार में बैकडोर एंट्री दिलाई गई।

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सूत्रों की मानें तो ED विशेष रूप से पूर्व मंत्री के बेटे रोहित उरांव के वित्तीय लेन-देन की पड़ताल कर रही है। आरोप है कि शराब नीति को प्रभावित करने और ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को टेंडर दिलाने में रसूखदारों के परिवारों का इस्तेमाल हुआ, जिसके बदले करोड़ों रुपये का ‘कट’ शेल कंपनियों के जरिए डायवर्ट किया गया।

2023 में छापेमारी और अब घेराबंदी

यह पहला मौका नहीं है जब रामेश्वर उरांव और उनका परिवार केंद्रीय एजेंसी की राडार पर आया है। साल 2023 में जब रामेश्वर उरांव सूबे के वित्त मंत्री हुआ करते थे, तब 23 अगस्त 2023 को ED ने उनके और उनके बेटे के ठिकानों पर एक साथ मैराथन छापेमारी की थी। उस दौरान भी शराब माफिया योगेंद्र तिवारी के सिंडिकेट में रोहित उरांव के पैसे लगे होने के इनपुट मिले थे। अब उन पुराने सबूतों का मिलान हालिया बयानों से किया जा रहा है।

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ACB की FIR को ED ने बनाया आधार

इस घोटाले की परतें सबसे पहले राज्य की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ( ACB ) ने खोली थीं। पिछले साल मई में एसीबी ने कांड संख्या 9/2025 के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसमें वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनय चौबे, उत्पाद विभाग के तत्कालीन संयुक्त सचिव गजेंद्र सिंह सहित 10 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया था। बाद में पूर्व आईएएस अमित प्रकाश को भी गिरफ्तार किया गया था।

शुरुआत में यह घोटाला 38 करोड़ रुपये का आंका जा रहा था, लेकिन जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, फर्जी बैंक गारंटी और अवैध होलोग्राम के जरिए सरकारी राजस्व को करीब 150 करोड़ रुपये से अधिक की चपत लगाने की बात सामने आई। इसी वित्तीय गड़बड़ी को देखते हुए ED ने ECIR संख्या 10/2025 दर्ज कर मामले को अपने हाथ में लिया था।

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