Thursday, July 23, 2026

झारखंड शराब घोटाला : ACB ने पूर्व उत्पाद सचिव IAS मनोज कुमार से लंबी पूछताछ की, कल फिर बुलाया गया

रांची : झारखंड में करोड़ों रुपये के शराब घोटाले की जांच कर रही एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बुधवार को राज्य के पूर्व उत्पाद सचिव और IAS अधिकारी मनोज कुमार से करीब कई घंटे तक पूछताछ की। ACB ने उनसे घोटाले से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे। हालांकि सूत्रों के अनुसार, अधिकारी के जवाबों से एजेंसी संतुष्ट नहीं दिखी, जिसके बाद मनोज कुमार को गुरुवार को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया गया है।

मनोज कुमार को ACB ने कुछ दिन पहले ही नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए तलब किया था। नोटिस मिलने के बाद वे बुधवार को ACB मुख्यालय पहुंचे, जहां जांच अधिकारियों ने उनसे लंबी पूछताछ की।

यह पूछताछ झारखंड के शराब घोटाले से जुड़ी है, जिसमें राज्य को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। इस मामले में ACB पहले ही राज्य के पूर्व उत्पाद सचिव IAS विनय चौबे को गिरफ्तार कर चुकी है।

कैसे हुआ घोटाला

ACB की जांच में यह खुलासा हुआ है कि कुछ निजी कंपनियों ने फर्जी गारंटी के जरिए राज्य में शराब आपूर्ति और वितरण का काम शुरू किया था। इन कंपनियों में प्रमुख हैं –

  • मेसर्स मार्शन इनोवेटिव सिक्यूरिटी सर्विस प्राइवेट लिमिटेड
  • मेसर्स विजन हॉस्पिटैलिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड

ACB के अनुसार, इन दोनों कंपनियों ने 2023 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर काम शुरू किया, जिससे सरकार को लगभग 38 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व नुकसान हुआ।

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बिना मंजूरी के किया गया करोड़ों का भुगतान

जांच में यह भी सामने आया है कि छत्तीसगढ़ की दो कंपनियों –

  • मेसर्स दीशिता वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड,
  • मेसर्स ओम साईं विबरेजेज प्राइवेट लिमिटेड को बिना मंत्री की जानकारी के 11 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया। ACB के अनुसार, यह भुगतान मनोज कुमार के उत्पाद सचिव रहते हुए किया गया था।

जबकि इन दोनों कंपनियों पर सरकार का करीब 450 करोड़ रुपये का बकाया पहले से ही दर्ज था। इसके बावजूद भुगतान कर दिया गया, जिससे भ्रष्टाचार और मिलीभगत की आशंका और गहराई से जांच के दायरे में आ गई है।

एसीबी की जांच जारी

ACB के अधिकारियों ने बताया कि मनोज कुमार से पूछताछ में कई अहम बिंदुओं पर सवाल किए गए हैं. जैसे – फर्जी गारंटी पर ठेके देने की प्रक्रिया, भुगतान की मंजूरी किस आधार पर दी गई, और किस स्तर से आदेश जारी हुए।

हालांकि अधिकारी ने कई सवालों के जवाब दिए, लेकिन एजेंसी के पास कुछ ऐसे दस्तावेज और लेनदेन की जानकारी है जो उनके जवाबों से मेल नहीं खा रहे हैं। इसी वजह से उन्हें गुरुवार को दोबारा बुलाया गया है ताकि पूछताछ को आगे बढ़ाया जा सके।

पिछली गिरफ्तारी से खुली परतें

इससे पहले, इसी घोटाले में ACB ने पूर्व उत्पाद सचिव विनय चौबे को गिरफ्तार किया था। चौबे पर भी घोटाले के दौरान वित्तीय अनियमितताओं और निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के आरोप हैं।

एसीबी की जांच अब उन अफसरों और कंपनियों तक पहुंच रही है जिन्होंने मिलकर शराब वितरण प्रणाली में गड़बड़ी की और राज्य के राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया।

क्या है अगला कदम

ACB सूत्रों के अनुसार, अगले चरण में उन कंपनियों के मालिकों और वित्तीय सलाहकारों से भी पूछताछ की जाएगी, जिन्होंने गारंटी और भुगतान की प्रक्रिया में भूमिका निभाई थी। एजेंसी इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इसमें राजनीतिक हस्तक्षेप या किसी उच्च अधिकारी की संलिप्तता रही है। झारखंड का यह शराब घोटाला राज्य के सबसे बड़े आर्थिक घोटालों में से एक बताया जा रहा है, जिसमें सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हुआ है। एसीबी का कहना है कि किसी भी अधिकारी या कंपनी को बख्शा नहीं जाएगा, जांच पूरी तरह निष्पक्ष और साक्ष्य आधारित होगी।

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एयर नाऊ स्पेशल

देश का एआई हब बनने की तैयारी कर रहा...

न्यूज़ डेस्क : झारखंड. ये नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? कोयला, लोहे की खदानें, मिनरल्स या शायद आदिवासी संस्कृति....
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