रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने मंगलवार को धनबाद के जज उत्तम आनंद की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए दोनों अभियुक्तों की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है. जस्टिस आर मुखोपाध्याय और जस्टिस पीके श्रीवास्तव की खंडपीठ ने दोनों की अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के 28 जुलाई 2022 के फैसले को सही ठहराया. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह घटना आकस्मिक नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई थी।
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घटना न्यायपालिका पर सीधा हमला
हाईकोर्ट ने सीबीआई की ओर से पेश किए गए वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्य को आधार बनाया, जिसमें सीसीटीवी फुटेज, फारेंसिक रिपोर्ट और मोबाइल काल डिटेल शामिल हैं। अदालत ने कहा कि आटो-रिक्शा चालक ने पूरी तरह से वाहन पर नियंत्रण रखते हुए जानबूझकर पीड़ित को टक्कर मारी थी। जस्टिस आर मुखोपाध्याय ने कहा कि साक्ष्य की भरमार के बीच मंशा (मोटिव) का अभाव महत्वहीन हो जाता है। उन्होंने कहा कि यह घटना न्यायपालिका पर सीधा हमला थी, इसलिए कड़ी सजा देना आवश्यक है।
साल 2021 में हुई थी घटना
बता दें कि 28 जुलाई, 2021 की सुबह करीब पांच बजे धनबाद की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद सुबह की सैर के लिए निकले थे। रंधीर वर्मा चौक के पास एक आटो-रिक्शा ने उन्हें जानबूझकर टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौत हो गई। बाद में इस घटना का सीसीटीवी फुटेज वायरल हुआ था. मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड सरकार ने जांच सीबीआइ को सौंप दी।
सीसीटीवी फुटेज, डीएनए रिपोर्ट और फोरेंसिक विशेषज्ञों की रिपोर्ट ने दोषियों की संलिप्तता को साबित किया। अदालत ने माना कि आटो-रिक्शा की चोरी और उसके बाद की घटनाएं पूर्व-नियोजित हत्या की ओर इशारा करती हैं। दोनों अपीलकर्ताओं को सामान्य मंशा के तहत दोषी ठहराया गया। निचली अदालत ने दोनों दोषियों को आजीवन कारावास (बिना किसी छूट के) सजा सुनाई थी।


