रांची: रिम्स में मरीजों के बेहतर इलाज व बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी एक जनहित याचिका मामले की सुनवाई में झारखंड हाईकोर्ट झालसा के सदस्य सचिव को निर्देश दिया कि वह विशेष टीम के जरिए रिम्स में दवा, पैथोलॉजी, ट्रामा सेंटर, पेयजल, मेंटेनेंस आदि की स्थिति का निरीक्षण कर 10 दिनों में रिपोर्ट दाखिल करें। कोर्ट ने मामले में प्रार्थी को भी निर्देश दिया है कि वह हाई कोर्ट के 10 अक्टूबर 2025 के आदेश के आलोक में रिम्स एवं राज्य सरकार के शपथ पत्र के आलोक में अपना प्रतिउत्तर दें कि रिम्स में शपथ पत्र में कही गई बातों का क्या-क्या अनुपालन हुआ है और क्या नहीं हुआ है।
कोर्ट ने प्रार्थी को इसे टेबुलर चार्ट के माध्यम से प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई तीन दिसंबर निर्धारित की है। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान व जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। बता दे कि रिम्स में इलाज की दयनीय स्थिति को झारखंड हाइकोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए उसे जनहित याचिका में तब्दील कर दिया था. साथ ही प्रार्थी ज्योति शर्मा की ओर से भी जनहित याचिका दायर रिम्स की व्यवस्था बेहतर बनाने की मांग की गयी है.
Also Read : राज्यपाल और राष्ट्रपति के लिए बिलों पर निर्णय की समयसीमा तय नहीं की जा सकती – सुप्रीम कोर्ट


