पटना : जदयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी के एक सांसद के विरुद्ध बड़ा कदम उठाया है। सीएम नीतीश ने बांका से जदयू के सांसद गिरधारी यादव की लोकसभा सदस्यता रद्द करने की अनुशंसा कर दी है। लोकसभा में पार्टी के नेता दिलेश्वर कामत ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिख कर जदयू सांसद गिरधारी यादव की लोकसभा सदस्यता रद्द करने की मांग कर दी है। पार्टी ने सांसद गिरधारी यादव पर पार्टी लाइन से हट कर काम करने और बयान देने का आरोप लगाया है। गिरधारी यादव बांका से दूसरी बार जदयू की टिकट पर सांसद बने हैं जबकि उनके बेटे ने विधानसभा चुनाव में राजद की टिकट पर चुनाव लड़ा था।
बीते वर्ष बिहार में चल रहे गहन मतदाता पुनरीक्षण कार्य (SIR) के विरोध में बयान देने के बाद जदयू ने सांसद गिरधारी यादव को कारण बताओ नोटिस जारी किया था साथ ही यह भी कहा था कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस नोटिस का सांसद ने कोई जवाब नहीं दिया था जिसके बाद अब पार्टी ने उनके विरुद्ध कार्रवाई करते हुए लोकसभा की सदस्यता रद्द करने की अनुशंसा कर दी है।
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बांका के सांसद गिरधारी यादव ने SIR को लेकर कहा था कि जब लोकसभा चुनाव के दौरान मतदाता सूची सही थी तो अब गलत कैसे हो गई या मैं गलत वोट से जीत कर सांसद बना हूँ। बिहार अभी बाढ़ की विभिषका से जूझ रहा है और ऐसे में इस समय SIR करवाना उचित नहीं है। गिरधारी यादव ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए SIR को लेकर कहा था कि यह पहले ही हो जाना चाहिए था या फिर विधानसभा चुनाव के बाद में। उस वक्त ही जदयू ने सांसद गिरधारी यादव को कारण बताओ नोटिस जारी किया था जिसमें कहा गया था कि पार्टी ने हमेशा ही चुनाव आयोग का समर्थन किया है, ऐसे में सांसद ने यह बयान दे कर पार्टी को शर्मसार किया है।
इसके साथ ही विधानसभा चुनाव में सांसद गिरधारी यादव के बेटे चाणक्य प्रकाश ने राजद के टिकट पर बेलहर विधानसभा से जदयू प्रत्याशी के विरोध में चुनाव लड़ा था। हालांकि इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था जबकि जदयू की तरफ से प्रत्याशी मनोज यादव थे। इससे पहले गिरधारी यादव खुद भी जदयू की टिकट पर दूसरी बार लोकसभा गये थे लेकिन अब पार्टी ने उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की है और लोकसभा अध्यक्ष से सदस्यता रद्द करने की अनुशंसा कर दी है।


