नई दिल्ली : पूर्व रेल मंत्री व राजद अध्यक्ष लालू यादव के खिलाफ जमीन के बदले नौकरी घोटाला मामले दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग दिल्ली हाईकोर्ट ने ठुकरा दिया है. लालू यादव ने केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआइ) द्वारा उनके और उनके परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने यह कहते हुए लालू यादव की याचिका खारिज कर दी कि याचिका मेरिट के आधार पर खारिज की जाती है।
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जस्टिस रविंदर दुडेजा ने लालू यादव की याचिका खारिज की. याचिका में साल 2022, 2023 और 2024 में दायर तीन आरोपपत्रों और मामले में संज्ञान के बाद के आदेशों को रद्द करने की भी मांग की गई थी. जज ने फैसला सुनाते हुए कहा कि याचिका में कोई दम नहीं है, इसलिए इसे खारिज किया जाता है.
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‘नौकरी के बदले जमीन’ मामला
‘जमीन के बदले नौकरी’ का मामला लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए 2004 से 2009 के दौरान मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य जोन में की गई ग्रुप डी नियुक्तियों से संबंधित है. पीटीआई के मुताबिक अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि ये नियुक्तियां कथित तौर पर आरजेडी सुप्रीमो के परिवार या सहयोगियों के नाम पर भर्ती किए गए लोगों द्वारा गिफ्ट में दी गई या ट्रांसफर की गई जमीनों के बदले की गई थीं.
साल 2022 में दर्ज हुआ था मामला
लालू यादव ने तर्क दिया था कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत सीबीआई द्वारा पूर्व स्वीकृति प्राप्त किए बिना इस मामले में जांच, एफआईआर, छानबीन और बाद में आरोपपत्र कानूनी रूप से मान्य नहीं हैं. यह मामला 18 मई, 2022 को लालू यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी, दो बेटियों, अज्ञात सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों सहित अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया था.


