रांची: झारखंड में खनिज संसाधनों पर सेस जारी रखने की मांग को लेकर JLKM के डुमरी विधायक जयराम महतो ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित MMDR बिल का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि देश को करीब 40 प्रतिशत खनिज उपलब्ध कराने वाले झारखंड को खनिज सेस के अधिकार से वंचित करना किसी भी दृष्टि से न्यायसंगत नहीं है। इस संबंध में डुमरी विधायक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है. अपने एक्स हैंडल पर उन्होंने पत्र की प्रति को भी शेयर किया है.
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जयराम महतो ने कहा कि झारखंड के रैयतों ने खनन परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर अपनी जमीन दी है। खनन गतिविधियों का असर यहां के लोगों की जमीन, आजीविका और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ऐसे में राज्य को खनिज संसाधनों से मिलने वाले राजस्व और सेस से वंचित करना झारखंड के हितों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि MMDR बिल के माध्यम से राज्यों के अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती। झारखंड को उसकी खनिज संपदा का उचित लाभ मिलना चाहिए और खनिज पर सेस जारी रहना चाहिए।
जयराम महतो ने पत्र में लिखा, “आज मैंने माननीय प्रधानमंत्री जी को पत्र लिखकर MMDR बिल का विरोध कर झारखंड में खनिज पर सेस जारी रखने की मांग की है। देश को लगभग 40% खनिज उपलब्ध कराने वाले झारखंड को खनिज सेस से वंचित करना न्यायसंगत नहीं है। झारखंड के रैयतों ने खनन परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर अपनी जमीन दी है। इसके बदले उन्हें विस्थापन, पलायन और प्रदूषण का दंश झेलना पड़ रहा है। ऐसे में खनिज संसाधनों से मिलने वाले राजस्व पर राज्य का अधिकार और उसकी विकास संबंधी जरूरतें और भी महत्वपूर्ण हो जाती हैं।”
“राज्य हित में मेरा माननीय प्रधानमंत्री जी से विनम्र अनुरोध है कि झारखंड जैसे खनिज संपदा से समृद्ध राज्यों की आर्थिक स्थिति, समेकित विकास की जरूरतों तथा जनता की उम्मीदों और आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पर पुनर्विचार किया जाए और इसे वापस लिया जाए। हमारा विरोध जारी रहेगा, झारखण्ड विरोधी विधेयक वापस नहीं लिया गया तो झारखंड के हक और अधिकार के लिए सड़क से सदन तक लोकतांत्रिक आंदोलन किया जाएगा…”


