रांची : राज्य के बोकारो, हजारीबाग, गिरिडीह, रांची व पलामू समेत विभिन्न जिलों में ट्रेजरी से हुए घोटाला मामले की जांच के सीएम हेमंत सोरेन के निर्देश पर उत्पाद विभाग के सचिव अमिताभ कौशल के नेतृत्व में गठित उच्चस्तरीय जांच समिति ने बोकारो और हाजरीबाग जिला प्रशासन से बीते 15 सालों से जुड़े दस्तावेजों की मांग की. जांच समिति ने 1 अप्रैल 2011 से लेकर 31 मार्च 2026 तक के ट्रेजरी से जुड़े सभी दस्तावेजों की मांग की है. बता दें कि हजारीबाग में करीब 30 करोड रुपए और बोकारो में करीब 10 करोड़ की निकासी की बात सामने आ रही है.
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बताया जा रहा है कि जांच समिति मामले की जांच को लेकर बिंदुवार रिपोर्ट तैयार कर रही है. फाइलों के मिलान से लेकर निकासी के डिजिटल हस्ताक्षरों तक, हर पहलू को खंगाला जा रहा है. समिति यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी राशि की निकासी के दौरान चेक एंड बैलेंस की प्रणाली क्यों फेल हो गई? उच्च स्तरीय जांच समिति यह भी पता लगाएगी कि ट्रेजरी सॉफ्टवेयर में ऐसी कौन सी खामियां थीं, जिसका फायदा घोटालेबाजों ने उठाया.
CID जांच शुरू, SIT का गठन
इधर ट्रेजरी घोटाला मामले में सीआईडी जांच भी शुरू हो गई है। सरकार के निर्देश पर सीआईडी ने इस मामले की जांच के लिए आईजी पंकज कंबोज के नेतृत्व में नौ सदस्यीय विशेष जांच टीम यानी एसआईटी का गठन किया है, इसमें एक डीआईजी, दो एसपी, तीन डीएसपी और दो इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी शामिल किए गए हैं। एसआईटी ने बोकारो और हजारीबाग में दर्ज इस मामले में दो प्राथमिकियों के आधार पर मामले की जांच शुरू कर चुकी है।
बताया जा रहा है कि सीआईडी टीम मुख्य रूप से इस घोटाले में अवैध निकासी के पीछे छिपे सिंडिकेट, फर्जी दस्तावेजों के जरिए मामले में शामिल सफेदपोश अधिकारियों व कर्मचारियों की पहचान की जाएगी. एसआईटी की जांच का दायरा केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से सॉफ्टवेयर की सुरक्षा में हुई सेंधमारी की भी पड़ताल की जाएगी.
साथ ही यह भी क्या यह घोटाला केवल कुछ क्लर्कों की मिलीभगत है या इसके पीछे कोई बहुत बड़ा नेक्सस काम कर रहा है? ट्रेजरी के सुरक्षित माने जाने वाले सॉफ्टवेयर में सेंधमारी कैसे की गई और कट कमीशन का खेल कैसे चलता रहा? वेतन के नाम पर करोड़ों रुपये किन-किन फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए और उन खातों का असली मालिक कौन है?


