रांची: महिला पर्यवेक्षिका नियुक्ति प्रक्रिया में मेरिट लिस्ट में शामिल कुमारी सोनम समेत 22 अभ्यर्थियों की याचिका पर मंगलवार को झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे। हाई कोर्ट ने पुछा कि जब पहली मेरिट लिस्ट में पर्याप्त संख्या में अभ्यर्थियों के नाम शामिल थे, तो दूसरे सूची के अभ्यर्थियों की नियुक्ति कैसे कर दी गई। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि 131 पद अब भी खाली होने के बावजूद पहली सूची के अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया से बाहर क्यों रखा गया।
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22 पद रिजर्व रखने का निर्देश
मामले की सुनवाई जस्टिस दीपक रौशन की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने JSSC को निर्देश दिया कि याचिका दायर करने वाले 22 अभ्यर्थियों के लिए 22 पद सुरक्षित रखे जाएं। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरीय अधिवक्ता अजित कुमार और अधिवक्ता अपराजिता भरद्वाज ने कोर्ट में पक्ष रखा। वहीं JSSC की ओर से अधिवक्ता संजोय पिपरवाल ने बहस की। प्रार्थियों ने अदालत को बताया कि लेडी सुपरवाइजर के 444 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। पहली मेरिट लिस्ट में 521 अभ्यर्थियों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए बुलाया गया था।
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वैध दस्तावेज होने को बावजूद बाहर करने का आरोप
याचिका में कहा गया कि डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया 4 जून 2025 को होनी थी। सभी आवश्यक और वैध दस्तावेज होने के बावजूद कई अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। इसके बाद आयोग ने दूसरी मेरिट लिस्ट जारी की, जिसमें 131 नए अभ्यर्थियों को शामिल किया गया। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पहली सूची में नाम होने के बावजूद उनकी नियुक्ति नहीं की गई, जबकि दूसरी सूची के उम्मीदवारों को चयनित कर लिया गया, जो न्यायसंगत नहीं है।


