रांची : शराब घोटाला, वन भूमि, खासमहाल जमीन घोटाला और आय से अधिक संपत्ति मामले के बाद अब धोखाधड़ी व जबरन वसूली समेत कई अन्य गंभीर मामलों को लेकर जेल में बंद निलंबित आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे के खिलाफ एक और प्राथमिकी दर्ज की गई है. प्राथमिकी विनय चौबे के करीबी और जेल में बंद नेक्सजेन के मालिक विनय कुमार सिंह के पूर्व पार्टनर दीपक कुमार ओझा ने कराई है. जगरनाथपुर थाना में 26 नवंबर को कांड संख्या 458/25 दर्ज हुआ है. इस मामले में विनय सिंह को भी आरोपी बनाया गया है.
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विनय सिंह पर भी आरोप
दर्ज प्राथमिकी में शिकायतकर्ता दीपक कुमार बताया है कि विनय कुमार चौबे के अलावा पूर्व पार्टनर विनय कुमार सिंह भी इस पूरे षड्यंत्र का मुख्य कर्ताधर्ता है. 2002 में विनय कुमार सिंह के साथ मिलकर नेक्सजेन सॉल्यूशन टेक्नोलॉजीज प्रा. लि. कंपनी बनाने के बाद बिजनेस के सिलसिले में आईएएस विनय कुमार चौबे से परिचय हुआ. साल 2006 में जब विनय चौबे पलामू के डीसी थे तो उन्होंने अपने भाई को, जो अब दिवंगत हो चुके हैं, उनके जरिए मेरे व्यापार और आमदनी को हड़पने की योजना बनाई. शिकायत के अनुसार विनय कुमार चौबे ने दबाव बनाकर अपने बड़े भाई, मनोज कुमार चौबे को दूसरी कंपनी, फोन्ट सिस्टम्स प्रा. लि. में जीएम के पद पर नियुक्त कराया.
2006 में फोन्ट सिस्टम्स को पलामू सदर अस्पताल और झारखंड के अन्य जिलों में करोड़ों के उपकरण आपूर्ति का काम मिला था, आरोप है कि इस आमदनी को हड़पने के उद्देश्य से, आरोपियों ने नेक्सजेन सॉल्यूशन कंपनी से दीपक कुमार को बाहर निकालने की साजिश रची. साजिश के तहत, आईएएस विनय कुमार चौबे ने अपने पद का दुरुपयोग कर तत्कालीन सिविल सर्जन, पलामू पर दबाव बनाया और पलामू में दो तथा रांची में एक झूठा आपराधिक मामला दीपक कुमार के विरुद्ध दर्ज करवाया, जिसके कारण उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था.
आधे शेयर ट्रांसफर करने का प्रयास
अपने शिकायत में दीपक कुमार ने कहा है कि 2003 में विनय कुमार सिंह ने विशाल सिंह नामक व्यक्ति को कंपनी में लाकर बिना अनुमति के दीपक कुमार के आधे शेयर ट्रांसफर करने का प्रयास किया और बैंक में अकेले ही हस्ताक्षर पैटर्न बदल दिया. शिकायतकर्ता द्वारा विरोध किए जाने पर बैंक ने पुराना पैटर्न बहाल किया. वर्ष 2006 में विनय कुमार सिंह पर आरोप है कि उन्होंने दीपक कुमार के जाली हस्ताक्षर बनाकर अपनी पत्नी स्निग्धा सिंह को नेक्सजेन सॉल्यूशन का निदेशक नियुक्त किया और उन्हें बैंक खाते से लेनदेन के लिए अधिकृत कर दिया.
जबरन बेदखली और करोड़ों का नुकसान
दीपक कुमार का आरोप है कि गिरफ्तारी और मानसिक प्रताड़ना के बाद उन्हें आईएएस विनय कुमार चौबे के दबाव में आकर विनय कुमार सिंह के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करना पड़ा. उसी दिन, कंपनी के खाते से 44 लाख अवैध रूप से स्निग्धा सिंह के निजी खाते में और फिर दीपक कुमार के खाते में ट्रांसफर किए गए. इसके तुरंत बाद आरोपियों ने धमकी और दबाव देकर दीपक कुमार से लोन अदा करने का झूठा आरोप लगाकर, चेक के माध्यम से वही 44 लाख वापस कंपनी के खाते में जमा करवा लिए.
इसी हेराफेरी और दबाव का उपयोग करके, स्निग्धा सिंह ने उनके हिस्से के सभी शेयर खरीद लिए और उन्हें कंपनी से बेदखल कर दिया गया, जबकि उन्हें एग्रीमेंट में लिखा डेढ़ लाख का भुगतान भी नहीं किया गया. दीपक कुमार का कहना है कि आईएएस अधिकारी विनय चौबे की धमकियों और पूर्व में फर्जी मुकदमे दर्ज कराकर जेल भेजने के डर से वे इतने वर्षों तक चुप्पी साधे रहे.
हाल ही में समाचार पत्रों से शराब घोटाले और जमीन घोटाले में अभियुक्तों (विनय कुमार सिंह और आईएएस विनय कुमार चौबे) के जेल जाने की जानकारी मिलने पर उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद जगी, जिसके बाद उन्होंने यह शिकायत दर्ज कराने का साहस जुटाया है. दीपक कुमार ने मांग की है कि सभी अभियुक्तों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर बैंक ऑफ इंडिया, श्यामली ब्रांच, रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी, रांची, और नगर थाना, डालटेनगंज से कागजात प्राप्त कर मामले की गहन जांच की जाए.


