नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से पूछा कि राजधानी के जंतर-मंतर इलाके को विरोध प्रदर्शन के लिए तय स्थल के रूप में बंद करने पर विचार क्यों नहीं किया जा रहा है. कोर्ट ने कहा कि शहर को बार-बार होने वाले प्रदर्शनों के कारण अनावश्यक रूप से प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए.
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बार एंड बेंच के मुताबिक, जस्टिस अमित महाजन ने सुनवाई के दौरान कहा, “आप इसे बंद क्यों नहीं कर देते? मेरे हिसाब से इस तरह की चीजें शहर के अंदर नहीं होनी चाहिए, लेकिन यह सरकार का फैसला है. शहर को अनावश्यक रूप से बंधक क्यों बनाया जाए?”
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हाईकोर्ट यह टिप्पणी ऑल इंडिया दलित क्रिश्चियन राइट्स प्रोटेक्शन कमेटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कर रहा था. याचिका में दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति देने के आवेदन पर फैसला लेने का निर्देश देने की मांग की गई थी.
कोर्ट की टिप्पणी पर बोले सीजेपी नेता
हाईकोर्ट के इस टिप्पणी के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने इस पर प्रतिक्रिया दी. सौरव दास ने एक्स पर लिखा, “हमारे जंतर-मंतर से दूर रहिए.” उन्होंने लिखा, “हमारा विरोध-स्थल छीनने की कोशिश करने से पहले, हमें बताएं कि क्या आप इंडिया गेट को उस जगह के तौर पर तय करेंगे जहां हम शांतिपूर्ण विरोध करने के अपने मौलिक अधिकार का इस्तेमाल कर सकें. आपने इंडिया गेट छीन लिया. हम अपना जंतर-मंतर भी छीने जाने को बर्दाश्त नहीं करेंगे.”
याचिकाकर्ता ने कहा
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय घोष ने कोर्ट को बताया कि पुलिस ने अभी तक न तो प्रदर्शन की अनुमति दी है और न ही आवेदन खारिज किया है. उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में अधिकतम 75 लोग शामिल होंगे और दिल्ली पुलिस जुलाई से उनके आवेदन पर कोई निर्णय नहीं ले रही है. जस्टिस महाजन ने कहा, “मेरे अनुसार इसे बंद कर देना चाहिए. यह दिल्ली के अंदर नहीं होना चाहिए.”
इस पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में भी इसी मुद्दे पर विचार किया जा रहा है और शीर्ष अदालत यह तय कर रही है कि क्या जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए नामित स्थल के रूप में रखा जा सकता है.


