न्यूज डेस्क: यूपी में विधानसभा चुनाव अगले साल मार्च-अप्रैल में होगा. जिसमें फिलहाल एक साल से भी कम समय बचा हुआ है. भाजपा ने योगी कैबिनेट विस्तार के बाद अब चुनाव पर फोकस कर रही है. मंगलवार को हिमंता बिस्वा सरमा सरकार के शपथ समारोह के बाद भाजपा लीडरशिप तैयारी में जुट चुकी है. पार्टी सूत्रों के अनुसार, आने-वाले दिनों में कभी भी यूपी में भाजपा की अहम बैठक हो सकती है. प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने उन 50-60 सीटों पर फोकस कर रही है जिसपर भाजपा हार गई है.
Highlights:
भाजपा का 60 सीटों पर फोकस
भाजपा को 2012-2022 तक के 3 चुनावों में सीट नहीं मिली है. जिसपर पार्टी लीडरशीप ने कहा कि यदि इन सीटों से करीब आधी भी जीत ली गई तो नतीजे बदल सकते है. भाजपा 60 सीटों पर जोर देने की बात कर रही है, उनमें 22 पूर्वांचल के आजमगढ़, मऊ, जौनपुर, गाजीपुर, मिर्जापुर शामिल है.
इसके अलावा 13 सीटें पश्चिम उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, बिजनौर और मुरादाबाद शामिल है. पश्चिम यूपी में इन जिलों में मुस्लिम बहुल आबादी वाली सीटों पर ऐसी स्थिति है. वहीं इसके साथ पूर्वांचल के जिलों में सपा मजबूत रही है. भाजपा का फोकस कमजोर इलाकों में पड़ा तो इन इलाकों में भी ताकत बढ़ जाएगी.
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जमीनी स्तर से ऐक्टिव
समाजवादी पार्टी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में 35 सीटों में 22 सीटों में जीत हासिल की थी. पूर्वी यूपी के मऊ, गाजीपुर जैसे जिलों में सपा की झोली भर गई, जिस कारण से 2017 के मुकाबले वह अच्छी स्थिति में आ गई. इस बार भाजपा सपा के उनके ही मजबूत इलाकों में घेर लेगी. मैनपुर, फर्रुखाबाद, इटावा में भाजपा जोर-शोर से तैयारी कर रही है. पश्चिम बंगाल के चुनाव में भी भाजपा कई महीनों पहले से ही ऐक्टिव थी और उससे सता मिल गई है. उसकी इस सक्रियता को बड़ी वजह माना गया.
रणनीति की तैयारी शुरु
भाजपा इस बार फिर यूपी में बूथ लेवल पर रणनीति तैयार कर रही है. पार्टी ने कहा कि बूथ लेवल पर फोकस करने से जमीनी स्तर तक कार्यकर्ता ऐक्टिव होते है और वोटरों को घर से निकालने में भी जुटते है. पहले भी कई बार चुनावों में भाजपा को इस रणनीति से काफी फायदा हुआ है. वहीं अब एक बार पिर नए तेवर और कलेवर के साथ पार्टी रणनीति पर जुटने को तैयार है.




