Friday, June 12, 2026

झारखंड में नदियों से बालू उठाव पर लगी रोक, राज्य के सभी 444 बालू घाटों से नहीं होगा बालू उठाव

रांची: झारखंड में बुधवार से बालू का संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश के तहत 10 जून से 15 अक्टूबर तक राज्य की नदियों से बालू उत्खनन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही राज्य के सभी 444 बालू घाटों पर खनन गतिविधियां बंद हो गई हैं। ऐसे में अगले चार महीनों तक निर्माण कार्य पहले से उपलब्ध स्टॉक और वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था पर निर्भर रहेंगे।

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निर्माण कार्यों पर पड़ सकता है असर

बालू खनन बंद होने का सबसे अधिक असर रांची समेत उन जिलों में पड़ने की संभावना है, जहां निजी और सरकारी निर्माण कार्य बड़े पैमाने पर चल रहे हैं। मकान निर्माण, सड़क परियोजनाएं, अपार्टमेंट और विभिन्न सरकारी योजनाओं में बालू की लगातार जरूरत रहती है। ऐसे में सीमित उपलब्धता के कारण निर्माण कार्यों की रफ्तार प्रभावित हो सकती है।

प्रतिबंध लागू होने से पहले ही बाजार में बालू की कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत मिलने लगे हैं। राजधानी रांची के कई इलाकों में आपूर्तिकर्ताओं द्वारा अधिक दर वसूली की शिकायतें सामने आ रही हैं। वहीं, कई कारोबारियों ने संभावित मांग को देखते हुए बड़े पैमाने पर बालू का भंडारण शुरू कर दिया है।

खनन विभाग के अनुसार

राज्य सरकार ने मानसून शुरू होने से पहले 35 बालू घाटों को चालू करने की योजना बनाई थी, ताकि प्रतिबंध अवधि के दौरान पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराया जा सके। हालांकि पर्यावरणीय मंजूरी और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में देरी के कारण केवल 14 घाटों से ही नियमित रूप से बालू उठाव शुरू हो पाया।

खनन विभाग के अनुसार रांची, दुमका, गोड्डा, पूर्वी सिंहभूम, रामगढ़ और हजारीबाग के कुछ चुनिंदा घाटों से ही बालू निकासी हो रही थी। राज्य के कुल 444 बालू घाटों में से 299 घाटों की बंदोबस्ती हो चुकी है, लेकिन बड़ी संख्या में घाट पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं मिलने के कारण शुरू नहीं हो सके।

स्टॉक पर टिकी रहेगी आपूर्ति

प्रतिबंध लागू होने से पहले घाट संचालकों और ठेकेदारों ने बड़े पैमाने पर बालू का भंडारण किया है। नदी घाटों के आसपास और अधिकृत स्टॉक यार्डों में आगामी चार महीनों की मांग को ध्यान में रखते हुए बालू जमा किया गया है। इसके बावजूद बढ़ती मांग और सीमित उपलब्धता के कारण कीमतों में और तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।

बालू की कमी का फायदा उठाकर कुछ स्थानों पर कालाबाजारी की शिकायतें भी सामने आने लगी हैं। पिछले वर्षों के अनुभव बताते हैं कि प्रतिबंध अवधि के दौरान अवैध उत्खनन, अवैध परिवहन और ऊंचे दामों पर बिक्री की घटनाओं में बढ़ोतरी होती है।

प्रशासन ने जारी किया सख्त निर्देश

रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने खनन विभाग को अवैध उत्खनन और कालाबाजारी पर विशेष निगरानी रखने का निर्देश दिया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध अवधि के दौरान नदी घाटों से बालू निकालने, उसका अवैध परिवहन करने या गैरकानूनी भंडारण करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण और नदियों के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने के लिए मानसून के दौरान हर वर्ष बालू उत्खनन पर रोक लगाई जाती है। हालांकि इस बार सीमित स्टॉक और बढ़ती मांग के कारण निर्माण क्षेत्र को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

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