रांची: झारखंड की राजधानी रांची स्थित CBI की विशेष कोर्ट ने बीते कुछ सालों में आपराधिक मुकदमों और भ्रष्टाचार से जुड़े दर्जनों मामलों में अपना फैसला सुनाया है और दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया है। CBI कोर्ट ने कुल 86 मुकदमों में अपना अंतिम निर्णय सुनाया है. इन फैसलों में केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई का पक्ष प्रभावी ढंग से रखते हुए अभियोजन पक्ष ने 74 मुकदमों में सफलता हासिल की है और इन 74 मामलों में आरोपियों को दोषी करार देकर सजा सुनाई गई है. ये मामले साल 2022 से लेकर अब तक के बताए जा रहे हैं।
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CBI के आंकड़ों पर नजर डालें तो पेश किये गए ठोस साक्ष्यों, मजबूत गवाही और वकीलों की बहस और दलीलों के कारण CBI ने भ्रष्टाचार और गंभीर अपराधों से जुड़े अधिकांश मामलों को अंजाम तक पहुंचाया. निष्पादित मामलों में से तीन मुकदमों को कानूनी प्रक्रियाओं के तहत वापस ले लिया गया है. क्योंकि ये तीनों मुकदमे काफी पुराने थे और मुख्य आरोपी लंबे समय से फरार चल रहे थे और उनकी गिरफ्तारी संभव नहीं हो पा रही थी.
इसके अलावा अदालत के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, फिलहाल रांची CBI कोर्ट में आय से अधिक संपत्ति और ट्रैप केस के अलावा आपराधिक प्रकृति के कुल 245 मामले विचाराधीन हैं, जिन पर सुनवाई जारी है. वर्ष 2022 से 2026 के बीच CBI अदालत ने कई बहुचर्चित और हाई-प्रोफाइल मामलों में ट्रायल पूरा कर फैसले दिए हैं. सभी महत्वपूर्ण मामलों में विशेष लोक अभियोजक प्रियांशु सिंह और खुशबू जायसवाल ने अदालत में प्रभावी ढंग से पक्ष रखा.
जिन प्रमुख मामलों में CBI कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है, उसमें हजारीबाग के रूपेश पांडेय मॉब लिंचिंग केस में आरोपियों को आजीवन कारावास सुनाई गई तो वहीं पूर्व नेशनल शूटर तारा शहदेव के धर्म परिवर्तन और प्रताड़ना के मामले में भी पति व अन्य आरोपियों को सजा सुनाई गई है। इसी तरह JPSC के पूर्व अध्यक्ष दिलीप कुमार से जुड़े मशीन खरीद घोटाला में भी कोर्ट ने आरोपियों को सजा सुनाई तो वहीं सीबीआई कोर्ट ने पूर्व मंत्री एनोस एक्का से जुड़े सीएनटी एक्ट उल्लंघन मामले में उन्हें सजा सुनाई। इसी तरह पूर्व मंत्री बंधु तिर्की को आय से अधिक सम्पति मामले में सजा कोर्ट ने सजा सुनाई तो उन्हें अपनी विधायकी गंवानी पड़ी।


