Sunday, September 13, 2026

JSSC नियुक्ति घोटाले की CID जांच में दबाई जा रही सच्चाई, प्रभावशाली लोगों को बचाया जा रहा : बाबूलाल मरांडी

रांची: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने JSSC नियुक्ति घोटाले को लेकर चल रही CID जाँच में लीपापोती का आरोप लगाते हुए कहा है कि जांच की दिशा बतला रही है कि यह सब केवल सच्चाई को दबाने और बड़ी मछलियों को बचाने की कवायद है।

 सोशल मीडिया के एक्स हैंडल पर एक पोस्ट में बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि जैसी आशंका थी, ठीक वैसा ही होने की शिकायतें मिल रही हैं। मामले में जिन लोगों को पकड़ा जा रहा है, जिनसे पूछताछ हो रही है, वे जब किसी हाईप्रोफ़ाइल नेता, अधिकारी या उनके बिचौलियों के माध्यम से रिश्वत के लेन-देन और उनकी संलिप्तता की बात बताते हैं, तो उनके बयानों से वे हिस्से हटवा दिए जा रहे हैं।

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उन्होंने कहा कि जाँच में शामिल कुछ छोटे अधिकारियों ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर हम तक यह शिकायत पहुँचाई है कि उनके विभागीय उच्चाधिकारी ऐसे बयान रिकॉर्ड में दर्ज नहीं करने का दबाव बना रहे हैं। यदि ये शिकायतें सही हैं, तो यह जाँच के नाम पर सच्चाई दबाने और प्रभावशाली लोगों को बचाने का बेहद गंभीर मामला है।

भाजपा नेता ने कहा कि इतने संवेदनशील मामले में बयान दर्ज करने की प्रक्रिया की वीडियोग्राफ़ी होनी चाहिए। मूल रिकॉर्डिंग बिना किसी छेड़छाड़, काट-छाँट या एडिटिंग के सुरक्षित रखी जानी चाहिए, ताकि कोई अधिकारी अपनी सुविधा से किसी का बयान बदल न सके और न बदलवा सके। लेकिन हमें मिल रही शिकायतों के मुताबिक ऐसा नहीं हो रहा है। आख़िर बयान में किसी बड़े नाम के आते ही उसे रिकॉर्ड से बाहर रखने की बेचैनी क्यों? जाँच सच सामने लाने के लिए हो रही है या कुछ चेहरों को बचाने के लिए?

उन्होंने आगे कहा कि पहले तो अपने एक से बढ़कर एक काले कारनामे के लिये कुख्यात रहे अनुराग गुप्ता की भूमिका को लेकर जाँच को ग़लत दिशा में ले जाने, साक्ष्य नष्ट करने और नियुक्ति में घोटाले से इनकार करने के गंभीर आरोप उठे। छात्रों-बेरोज़गारों के ऐतिहासिक आक्रोश के बाद CID के रुख में आए बदलाव ने इन सवालों को और गहरा किया। जिस मामले में पहले घोटाले से इनकार किया जा रहा था, उसी में बाद की कार्रवाई उस शुरुआती रुख की जवाबदेही भी माँगती है। अब दूसरे दाग़दार अधिकारी मनोज कौशिक की अगुवाई में चल रही CID जाँच पर भी यह शिकायत सामने आ रही है कि छोटी मछलियों को बलि का बकरा बनाकर बड़ी मछलियों और असली सरगनाओं को जाँच की आँच से बचाया जा रहा है। इन शिकायतों का जवाब निष्पक्ष कार्रवाई और सुरक्षित साक्ष्यों से देना होगा। केवल छोटे लोगों की गिरफ़्तारी दिखाकर बड़े नामों पर पर्दा डालने की आशंका दूर नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि जाँच में लगे अधिकारियों से हमारा स्पष्ट आग्रह और कड़ी चेतावनी है कि यदि बयानों से नाम हटाने, डिजिटल साक्ष्य मिटाने या दबाव डालकर मनमाने बयान दर्ज कराने का खेल चल रहा है, तो उसे तत्काल बंद कीजिए। वर्दी और पद के साथ मिली ज़िम्मेदारी निभाइए। छात्रों के भविष्य के साथ हुए अन्याय पर पर्दा डालने का बोझ अपने सिर मत लीजिए। याद रखिए, आज किसी प्रभावशाली व्यक्ति को बचाने के लिए रिकॉर्ड से हटाया गया सच, कल आपकी अपनी भूमिका पर सवाल बनकर खड़ा हो सकता है। CBI जाँच होने पर मूल घोटाले के साथ जाँच को प्रभावित करने और साक्ष्य दबाने की शिकायतों की भी पड़ताल होनी चाहिए। जिन अधिकारियों के सेवाकाल के पुराने कारनामों से जुड़े प्रमाण सामने आएँ, उनकी भी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। कुर्सी छूट जाने से किए-धरे की जवाबदेही समाप्त नहीं हो जाती।

उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी के अधिकारियों के लिए भी ये नसीहत है कि सत्ता की कृपा पाने के लिए अपनी सेवा, साख और ज़मीर को दाँव पर मत लगाइए। जिनके लिए आज सच दबाएँगे, कल जवाब देने की बारी आई तो वे आपके साथ खड़े हों, इसकी कोई गारंटी नहीं।

उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अनुरोध किया है कि छात्रों-बेरोज़गारों को दोबारा सड़क पर उतरने के लिए मजबूर मत कीजिए। बिना विलंब CBI जाँच की अनुशंसा कीजिए और सभी मूल बयान, वीडियो रिकॉर्डिंग तथा डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था सुनिश्चित कीजिए। युवाओं की उम्र और अवसर लौटाए नहीं जा सकते। उनके भविष्य से खिलवाड़ करने वाले असली गुनहगारों और इन गुनाहगारों को बचाने वालो की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।

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एयर नाऊ स्पेशल

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