जमशेदपुर : हिमांशु हत्याकांड को लेकर जमशेदपुर का माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने घटना के विरोध में 3 जुलाई को जमशेदपुर बंद का आह्वान किया है। इस बीच, जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय की ओर से बुधवार शाम बुलाई गई महत्वपूर्ण बैठक निषेधाज्ञा लागू होने के कारण स्थगित कर दी गई।
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बता दें कि चर्चित डबल डाउन बार हत्याकांड में करणी सेना युवा मोर्चा के सरायकेला-खरसावां जिलाध्यक्ष हिमांशु सिंह की मौत के बाद बुधवार को झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास आदित्यपुर स्थित उनके आवास पहुंचे। उन्होंने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर गहरी संवेदना व्यक्त की और हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया।
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परिजनों ने घटना को लेकर कहा
उधर, मृतक हिमांशु सिंह के परिजनों ने अपने रुख को और सख्त करते हुए साफ कहा है कि न्याय मिलने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। परिजनों की मांग है कि मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी दी जाए, हत्याकांड में शामिल सभी दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई हो और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।
परिजनों ने आरोप लगाया कि उनकी सहमति के बिना जबरन पोस्टमार्टम कराया गया, जिसका उन्होंने कड़ा विरोध किया। उन्होंने शव लेने से भी इनकार कर दिया है। परिवार का कहना है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक वे शव स्वीकार नहीं करेंगे।
हिमांशु के घर पहुंचे रघुवर

इधर मीडिया से बातचीत में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने अब तक हुई प्रशासनिक कार्रवाई और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा लिए गए फैसलों का स्वागत करते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू होना सकारात्मक संकेत है, लेकिन पीड़ित परिवार को वास्तविक न्याय दिलाने के लिए तेज, प्रभावी और समयबद्ध कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने कहा कि अपराधियों को ऐसी सजा मिले, जो भविष्य में अपराध करने वालों के लिए नजीर बने।
पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि लगातार बढ़ती आपराधिक घटनाएं लोगों में असुरक्षा की भावना पैदा कर रही हैं। सरकार को अपराध नियंत्रण के लिए सख्त और प्रभावी रणनीति अपनानी होगी, ताकि आम नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें।
रघुवर दास ने बताया कि हिमांशु सिंह के परिजन मृतक के आश्रित को स्थायी सरकारी नौकरी देने की मांग कर रहे हैं। इस संबंध में उनकी दोनों जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत हुई है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में स्थायी नौकरी देना चाहती है तो कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर आवश्यक निर्णय लेना होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार पीड़ित परिवार की इस मांग पर संवेदनशीलता के साथ विचार करेगी।
परिजनों को नौकरी का प्रस्ताव
इस बीच प्रशासन की ओर से अनुबंध आधारित नौकरी का प्रस्ताव लेकर अधिकारियों की टीम परिजनों के पास पहुंची, लेकिन परिवार और समर्थकों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उनका स्पष्ट कहना है कि उन्हें केवल स्थायी सरकारी नौकरी, सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और अन्य लंबित मांगों पर लिखित आश्वासन ही स्वीकार होगा।
फिलहाल मामले में गतिरोध बरकरार है। प्रशासन लगातार परिजनों और समर्थकों से वार्ता कर समाधान निकालने की कोशिश में जुटा है। वहीं शहर के प्रबुद्धजन, सामाजिक संगठन और जनप्रतिनिधि भी संवाद के जरिए ऐसा रास्ता तलाश रहे हैं, जिससे पीड़ित परिवार को न्याय मिले और क्षेत्र में शांति व सौहार्द का माहौल बना रहे।




