Wednesday, July 22, 2026

आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट बेहद सख़्त, कहा ‘कुत्तों के डर के बिना जीना सबका हक़’

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को लेकर अपने पहले के आदेश को वापस लेने से इनकार कर दिया है. मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में दाख़िल कई याचिकाओं को ख़ारिज कर दिया. लाइव लॉ के मुताबिक़ जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की पीठ ने अपने निर्देशों में बदलाव करने की मांग ठुकरा दी.

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सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल (2025) नवंबर के अपने आदेश में कहा था कि अस्पतालों, बस अड्डों, स्कूलों, रेलवे स्टेशनों जैसी सार्वजनिक जगहों से पकड़े गए आवारा कुत्तों को टीकाकरण या नसबंदी के बाद उसी जगह पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा. दूसरे शब्दों में, सार्वजनिक स्थानों से पकड़े गए आवारा कुत्तों को अब शेल्टर होम में ही रखा जाएगा.

अदालत ने एनिमल वेलफ़ेयर बोर्ड ऑफ़ इंडिया की जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) को चुनौती देने वाली याचिकाओं को भी ख़ारिज कर दिया. मंगलवार को अपने फ़ैसले में अदालत ने बच्चों पर कुत्तों के हमलों की ‘बेहद चिंताजनक घटनाओं’ से जुड़ी रिपोर्टों का उल्लेख किया. अदालत ने कहा कि छोटे बच्चों को नोचा गया, बुज़ुर्गों पर हमले हुए और यहाँ तक कि विदेशी यात्रियों को भी कुत्तों के हमलों का सामना करना पड़ा.

अदालत ने लोगों की जान को कुत्तों के हमलों से सुरक्षित रखने में विफल रहने के लिए राज्य सरकारों और प्रशासनिक अधिकारियों को ज़िम्मेदार ठहराया. अदालत ने कई मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा, “कुत्तों के काटने का ख़तरा अब हवाई अड्डों और रिहायशी इलाक़ों समेत महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थानों तक फैल चुका है.”

अदालत ने कहा कि यह समस्या “बेहद व्यापक” रूप ले चुकी है और “ऐसी घटनाओं का लगातार दोहराया जाना” निर्देशों के पालन में कमी को दर्शाता है. अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि जो अधिकारी इन आदेशों को लागू करने में विफल रहेंगे, उनके ख़िलाफ़ अवमानना और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है.

फै़सला सुनाते हुए अदालत ने कहा, “गरिमा के साथ जीने के अधिकार में यह अधिकार भी शामिल है कि व्यक्ति कुत्तों के हमलों के डर के बिना स्वतंत्र रूप से जीवन जी सके. राज्य मूक दर्शक बनकर नहीं रह सकता. अदालत भी उन कठोर ज़मीनी हक़ीक़तों से आँखें नहीं मूँद सकती, जहाँ बच्चे, विदेशी यात्री और बुज़ुर्ग कुत्तों के काटने की घटनाओं का शिकार हुए हैं. संविधान ऐसे समाज की कल्पना नहीं करता, जहाँ बच्चों और बुज़ुर्गों का जीवन केवल शारीरिक ताक़त या क़िस्मत के भरोसे हो.”

नवंबर 2025 का आदेश

इससे पहले नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की एक बेंच ने अपने एक आदेश में सभी राज्य सरकारों से कहा था कि वो आवारा कुत्तों और मवेशियों को हाईवे, सड़कों और एक्सप्रेस-वे से हटा दें. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था, “इसका सख़्ती से पालन करना ज़रूरी है वरना अधिकारियों को व्यक्तिगत तौर पर ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा.”

कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह भी निर्देश दिए थे कि वे सरकारी और निजी संस्थानों की पहचान करें, जिनमें अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, सार्वजनिक खेल परिसर, रेलवे स्टेशन शामिल हैं. उन्हें इस तरह घेर दें कि आवारा कुत्ते अंदर न आ सकें.

कोर्ट ने यह भी कहा कि अधिकारियों को ऐसे परिसरों से मौजूद आवारा कुत्तों को हटाकर उनकी नसबंदी करानी होगी. इसके बाद उन्हें डॉग शेल्टर में भेजना होगा. कुछ वकीलों ने आदेश पर चिंता जताई थी और कोर्ट से इसे संशोधित करने के लिए सुनवाई की मांग की. हालाँकि बेंच से इसे ख़ारिज कर दिया.

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एयर नाऊ स्पेशल

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