Tuesday, July 28, 2026

चाईबासा के सारंडा जंगल में IED ब्लास्ट में हाथी ज़ख्मी, रेस्क्यू में जुटा वन विभाग

चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर प्रखंड अंतर्गत सारंडा जंगल में आईईडी विस्फोट की चपेट में आने से एक जंगली हाथी गंभीर रूप से घायल हो गया है। उसकी हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है। हाथी के आगे के दाहिने पैर में गहरी चोट आई है, जिससे उसकी उंगलियां उड़ गई हैं और मांस के लोथड़े लटक रहे हैं. वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू और उपचार में जुटी हुई है।

मिली जानकारी के अनुसार रविवार शाम जराइकेला थाना क्षेत्र के कोलबोंगा गांव के पास अंकुआ कंपार्टमेंट संख्या-48 के जंगल में कुछ ग्रामीण मछली पकड़ने गए थे. इसी दौरान उन्होंने हाथी को घायल अवस्था में देखा और तुरंत इसकी सूचना वन विभाग को दी और लगभग चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद हाथी का प्राथमिक इलाज शुरू किया.

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दो दिन पहले घायल हुआ था हाथी

वन विभाग के सूत्रों के मुताविक दो दिन पहले चिरिया ओपी क्षेत्र के पोंगा जंक्शन के पास जंगल में ब्लास्ट की घटना सामने आई थी. आशंका जताई जा रही है कि उसी विस्फोट में यह हाथी घायल हुआ है. वहीं मनोहरपुर प्रखंड के पशुपालन पदाधिकारी डॉ. संजय घोलटकर के अनुसार हाथी कई दिन पहले ही घायल हुआ था. फिलहाल हाथी की स्थिति काफी गंभीर है और वह चलने-फिरने में भी असमर्थ बताया जा रहा है.

वन विभाग की टीम लगातार निगरानी कर रही है और उसे बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं. हालांकि उसकी स्थिति को देखते हुए वचने की संभावना कम वताई जा रही है. इस घटना ने एक बार फिर जंगल क्षेत्रों में आईईडी जैसे खतरनाक विस्फोटकों के खतरे को उजागर कर दिया है, जिससे वन्यजीवों पर भी गंभीर असर पड़ रहा है.

घायल हाथी का उपचार

वन विभाग की टीम ने केले में दवा भरकर हाथी को खिलाई, जिसे उसने खा लिया. फिलहाल हाथी की हालत पर लगातार निगरानी रखी जा रही है. पशु चिकित्सक डॉक्टर संजय कुमार ने बताया कि घायल हाथी को एंटीबायोटिक, दर्द निवारक और सूजन कम करने की दवाइ‌यां दी गई हैं. उन्होंने कहा कि चोट का कारण किसी बड़े इंपैक्ट से हुआ है, हालांकि आईईडी ब्लास्ट से इनकार नहीं किया जा सकता. डॉक्टर कुमार ने बताया कि टीम हाथी को सुरक्षित स्थान पर ले जाने का प्रयास कर रही है ताकि उसका बेहतर इलाज किया जा सके.

सूत्रों के अनुसार घायल हाथी लगभग 10 से 12 वर्ष की मादा है. पैर में गहरी चोट के कारण वह ठीक से चल नहीं पा रही है. वन विभाग की टीम लगातार उसकी स्थिति पर नजर रखे हुए है और उसके जल्द स्वस्थ होने के प्रयास किए जा रहे हैं.

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