नई दिल्ली : लोकसभा में मंगलवार दोपहर पेपर लीक से जुड़े ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा शुरू हो गई है. इस विधेयक में 2024 में बने क़ानून में बदलाव का प्रस्ताव है. इस दौरान सदन में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सभी दल इस बात पर सहमत हुए हैं कि 6 घंटे की चर्चा को 2 घंटे और बढ़ाकर 8 घंटे कर दिया जाए. उन्होंने कहा, “स्पीकर ने अभी कहा है कि इसे एक घंटा और बढ़ाने में हमें कोई आपत्ति नहीं है. अगर 8 घंटे से भी ज़्यादा समय की ज़रूरत पड़ी, तो हम 10 घंटे की चर्चा के लिए भी तैयार हैं.”
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मील का पत्थर साबित होने वाला क़ानून
चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह संशोधन विधेयक भारतीय संसद के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने वाला क़ानून है. उन्होंने कहा कि यह विधेयक साल 2024 में लाए गए अधिनियम में संशोधन के लिए पेश किया गया है. उन्होंने कहा कि 2024 का क़ानून स्वतंत्र भारत के इतिहास में अपनी तरह का पहला क़ानून था, जिसे केंद्र सरकार लेकर आई थी.
डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि वर्ष 2024 का क़ानून और अब लाया गया संशोधन, दोनों ही छात्रों और युवाओं के हितों की रक्षा के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हैं. उन्होंने कहा, “संशोधन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संकल्प को भी मज़बूत करता है, जिसके तहत देश के बच्चों के भविष्य से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होने दिया जाएगा. यह विधेयक भारतीय संसद के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने वाला क़ानून है, जो सार्वजनिक परीक्षाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.”


