रांची: झारखंड हाईकोर्ट में पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम की याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) और बचाव पक्ष दोनों ने अपने-अपने तर्क अदालत के सामने रखे। सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान ED ने आरोप लगाया कि टेंडर आवंटन में अनियमितताएं की गईं और इसके बदले कमीशन लिया गया। वहीं, बचाव पक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए राहत की मांग की। दोनों पक्षों की विस्तृत बहस के बाद कोर्ट ने तुरंत फैसला सुनाने के बजाय आदेश सुरक्षित रखना उचित समझा।
Highlights:
टेंडर घोटाले से जुड़ा है मामला
यह पूरा मामला ग्रामीण विकास विभाग में टेंडर आवंटन में कथित गड़बड़ियों और कमीशनखोरी से जुड़ा है। जांच एजेंसी का दावा है कि कुछ चुनिंदा कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए टेंडर दिए गए और इसके बदले अवैध राशि ली गई। प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में जांच के दौरान कई जगहों पर छापेमारी की थी। इसी क्रम में बड़ी मात्रा में नकदी भी बरामद की गई थी, जिसके बाद आलमगीर आलम को 2024 में गिरफ्तार किया गया था। अब इस मामले में हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार किया जा रहा है। यह फैसला न केवल आरोपी के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होगा, बल्कि पूरे टेंडर घोटाले की दिशा भी तय कर सकता है।
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