न्यूज डेस्क : एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट ने अरुणाचल प्रदेश में ट्रांस-अरुणाचल हाईवे से जुड़े लैंड कंपनसेशन स्कैम के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने राज्य के कई ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया है। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत की गई, जिसमें अब तक 2.2 करोड़ रुपये नकद जब्त किए जाने की पुष्टि हुई है।
Highlights:
44 करोड़ रुपये का नुकसान
ED के अनुसार, यह घोटाला ट्रांस-अरुणाचल हाईवे परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान मुआवजे के आकलन, प्रमाणन और वितरण में हुई गंभीर अनियमितताओं से जुड़ा है। एजेंसी का अनुमान है कि इस पूरे मामले में राज्य सरकार के खजाने को लगभग 44 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां
पोटिन-बोपी हाईवे परियोजना की कुल लंबाई 157.70 किलोमीटर है। प्रशासनिक रूप से इसे तीन सेक्टरों में बांटा गया है याचुली सेक्टर (0.00 से 43.635 किमी), जीरो सेक्टर (43.635 से 63.700 किमी) और रागा सेक्टर (63.700 से 149.440 किमी)। जांच में सामने आया है कि मुआवजा वितरण में इन सेक्टरों के स्तर पर भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां की गईं।
अधिकारियों संग मिलीभगत
ED की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि सरकारी अधिकारियों और निजी लाभार्थियों के बीच मिलीभगत थी। जांच के अनुसार, जीरो के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर ने शुरुआत में पूरे पोटिन-बोपी स्ट्रेच के लिए 289.40 करोड़ रुपये का मुआवजा प्रस्तावित किया था। हालांकि, बाद में एक राज्य-स्तरीय बैठक में इस राशि को घटाकर 198.56 करोड़ रुपये तक सीमित कर दिया गया।
इसके बावजूद, मुआवजा वितरण के दौरान नियमों को दरकिनार कर बड़ी रकम कथित तौर पर सेविंग अकाउंट्स में ट्रांसफर की गई। कई मामलों में फर्जी और अयोग्य लाभार्थियों के नाम पर चेक जारी किए गए। ED का कहना है कि इन्हीं अनियमितताओं के चलते राज्य को लगभग 44 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।


