रांची: झारखंड की राजधानी राँची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) के न्यूरोसर्जरी विभाग को अब दुनिया की सबसे उन्नत तकनीक ‘Carl Zeiss Kinevo’ न्यूरोसर्जिकल माइक्रोस्कोप से लैस कर दिया गया है। खास बात यह है कि उद्घाटन के चंद घंटों के भीतर ही इस मशीन की मदद से डॉक्टरों ने एक महिला की जान बचाकर इसकी उपयोगिता साबित कर दी है।
Highlights:
दरअसल रिम्स निदेशक प्रो. डॉ. राजकुमार ने इस अत्याधुनिक न्यूरोसर्जिकल माइक्रोस्कोप का उद्घाटन किया। जिसके तुरंत बाद इस मशीन की मदद से न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद प्रकाश के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने 59 वर्षीय महिला का जटिल ट्यूमर का सफल ऑपरेशन किया। उक्त महिला लंबे समय से गंभीर सिरदर्द, उल्टी और दौरों से परेशान थी और इलाज के लिए रिम्स में भर्ती हुई, जहां जांच के दौरान महिला के दाहिने ‘फ्रंटल लोब’ में एक जटिल ब्रेन ट्यूमर पाया गया था।
इस अत्याधुनिक माइक्रोस्कोप की मदद से सर्जरी को पूरी सतर्कता के साथ अंजाम दिया गया और ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकाला गया। ऑपरेशन में एनेस्थीसिया विभाग की ओर से प्रो. प्रवीण तिवारी, डॉ. भारती और डॉ. रीना का भी अहम योगदान रहा। सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति स्थिर बताई जा रही है और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की संभावना है।
क्यों खास है ‘Carl Zeiss Kinevo’ माइक्रोस्कोप?
मस्तिष्क और रीढ़ की जटिल सर्जरी के लिए डिजिटल और ऑप्टिकल विज़ुअलाइज़ेशन के उच्चतम मानकों की आवश्यकता होती है। नया Carl Zeiss Kinevo अत्याधुनिक 3D डिजिटल इमेज क्वालिटी प्रदान करता है जिससे छोटे शारीरिक स्थलों और ऊतकों के रंग में अंतर को उच्च रिज़ॉल्यूशन पर देखा जा सकता है। यह केवल एक माइक्रोस्कोप नहीं, बल्कि न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में डॉक्टरों की ‘तीसरी आंख’ है।
इस मशीन से सर्जरी के दौरान मस्तिष्क की नसों और ऊतकों का 3D दृश्य मिलता है, जिससे गलती की गुंजाइश खत्म हो जाती है। साथ ही इसमें मौजूद विशेष डाई और सॉफ्टवेयर सामान्य ऊतकों और कैंसरग्रस्त कोशिकाओं के बीच स्पष्ट अंतर दिखाते हैं। यह तकनीक डॉक्टर को ट्यूमर के उस हिस्से तक पहुँचने में मदद करती है, जिसे नग्न आंखों या सामान्य मशीनों से देखना नामुमकिन है।
आधुनिक तकनीक से लैस इस माइक्रोस्कोप को न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। अब तक जटिल ब्रेन सर्जरी के लिए झारखंड के मरीजों को दिल्ली या वेल्लोर जैसे महानगरों का रुख करना पड़ता था। रिम्स में इस मशीन के आने से अब गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को भी विश्वस्तरीय इलाज रांची में ही मिल सकेगा।


