दुमका : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सोमवार को पूर्वी क्षेत्र के पहले झारखंड कॉमर्शियल फ्लाइंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट का उद्घाटन दुमका एयरपोर्ट पर करेंगे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री दुमका एयरपोर्ट पर ही आयोजित सेवा का अधिकार सप्ताह समारोह के तहत दुमका के लोगों को कई बड़ी सौगात देंगे। झारखंड सरकार की ओर से संचालित इस इंस्टीट्यूट में प्रत्येक वर्ष 30 योग्य छात्रों को ट्रेनिंग दी जाएगी। इनमें 15 सीटें आरक्षित श्रेणी की होंगी। आरक्षित श्रेणी के प्रशिक्षुओं को मुफ्त ट्रेनिंग दी जाएगी। दो चरणों में ट्रेनिंग पूरी होगी।
Highlights:
पहले चरण में दुमका में कॉमर्शियल पायलट लाइसेंस विद मल्टी इंजन रेटिंग की ट्रेनिंग दी जाएगी। जबकि दूसरे चरण में टाइप रेटिंग आन एयर बस ए-320 की ट्रेनिंग दी जाएगी। यह ट्रेनिंग देश के प्रमुख सिविलेयेटर ट्रेनिंग सेंटरों के माध्यम से कराई जाएगी। पूरी ट्रेनिंग की अवधि 200 घंटे की होगी। दुमका में ट्रेनिंग के लिए तमाम तैयारियां व आधारभूत संरचनाएं पूरी कर ली गई है। वर्तमान में दुमका में तीन जेलिन एयरकाफ्रट, तीन ग्लाइडर और एक स्टीमी एयरक्राफ्ट हैं। डीजीसीए के तय मानकों को पूरा करने के उपरांत इंस्टीट्यूट ने एफटीओ का लाइसेंस भी हासिल कर लिया है।
2008 में दिशोम गुरू ने देखा था सपना
बात 10 नवंबर 2008 की है तब गुरुजी शिबू सोरेन झारखंड के मुख्यमंत्री थे। उन्होंने दुमका हवाई अड्डे पर ‘सोना-सोबरन अंतरराष्ट्रीय उड़ान अकादमी’ का उद्घाटन किया था. सोना-सोबरन गुरुजी के माता-पिता का नाम है. उन्हीं के नाम पर अंतरराष्ट्रीय उड़ान अकादमी की स्थापना नागर विमानन विभाग ने की थी. तब रांची से सात छोटे विमान दुमका हवाई अड्डे पर ले गये थे. आनन-फानन में बांस-चल्ली और कपड़ों से घेर कर बनाये गये तंबू को स्टेंट हैंगर का दर्जा दिया गया था. तब गुरुजी ने कहा था कि यह अकादमी यहां के युवक युवतियों के हवाई जहाज उड़ने के सपनों को पूरा करेगी.
पायलट प्रशिक्षण के लिए प्रक्रिया भी शुरू की गयी थी. फॉर्म भरवाये गये थे. परीक्षा भी ली गयी थी. नतीजे भी निकाले गये थे, मगर कई सौ करोड़ का यह प्रोजेक्ट शुरू होने से पहले ही बंद हो गया था. स्टेट हैंगर का कपड़ा घर हवा में चिथड़ा-चिथड़ा हो गया. झुलसा देने वाली गर्मी में विमानों को खुले आसमान के नीचे महीनों तक रखा गया. उनकी रखवाली में लगे गार्ड उन विमान के डैनों पर अपना कपड़ा सुखाने लगे. एक दिन ऐसा भी आया, जब नागर विमानन विभाग ने सभी विमानों को चुपचाप रांची मंगवा लिया।
नहीं ली गई थी एनओसी
तब यह बात सामने आयी थी कि इस अंतरराष्ट्रीय अकादमी की स्थापना से पहले एनओसी के लिए अर्जी नहीं डाली गयी थी और इसकी प्रक्रिया भी शुरू नहीं की गयी थी। एयर ट्रैफिक कंट्रोलर से इस अकादमी की स्थापना के बाबत अनुमति नहीं ली गयी थी. यह बात भी सामने आयी थी कि दुमका नेपाल-कोलकाता अंतरराष्ट्रीग ट्रैफिक रूट में आता है और इस तरह के रूट पर पायलट प्रशिक्षण की अनुमति सामान्यतः नहीं दी जाती है.
वहीं, वायु सेना का सिंगारसी में रडार है, जहां से भारत-बांग्लादेश की हवाई सीमा में होने वाली गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। यह रडार यूनिट मूल रूप में 29 मार्च 1965 को रामपुरहाट (पश्चिम बंगाल) में स्थापित किया गया था, जो बाद में 30 अक्टूबर 1967 को सिंगारसी में स्थानांतरित कर दिया गया. शुरू में ‘स्टार सैफिर’ रडार प्रणाली लगायी गयी थी, जिसे बाद में सितंबर 1992 में टीएचडी-1955 रडार से बदल दिया गया और भी कई तकनीकी मामले सामने आये थे और राज्य भर में इसे लेकर अच्छी-खासी बहस हुई थी. लिहाजा, तब पूरा मामना ठंडे बस्ते में चला गया था और जिन युवक-युवतियों का चयन पायलट प्रशिक्षण के लिए हुआ था, उनका भविष्य अंधेरे में चला गया था।
18 साल बाद पूरा होगा सपना
2010 में दोबारा मुख्यमंत्री बनने पर गुरु जी ने अपने माता-पिता के नाम पर स्थापित इस अंतरराष्ट्रीय अकादमी को शीघ्र शुरू करने की फिर पहल की थी. 11 अप्रैल 2010 को गुरुजी ने दुमका हवाई अड्डे पर सोना-सीवरन अंतरराष्ट्रीय उड़ान अकादमी को चालू करने का भरोसा दिया था. बहरहाल बहुत बाद में यहां सीमित प्रशिक्षण शुरू हुआ, मगर वह गुरुजी के सपनों के अनुरूप नहीं था. लेकिन अब जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दुमका एयरपोर्ट पर संचालित झारखंड फ्लाइंग इंस्टीट्यूट में कॉमर्शियल पायलट ट्रेनिंग का उद्घाटन कर रहे हैं और अब जब दिशोम गुरू शिबू सोरेन हम सभी के बीच उपस्थित नहीं हैं तो उम्मीद है कि 18 साल पहले देखा गया दिशोम गुरू का सपना हकीकत बनेगा और झारखंड के युवा अपने सपनों की लंबी उड़ान भर सकेंगे.

